कभी-कभार हमें भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वर्णिम दिनों की याद दिलाई जाती है. वो समय, जब इस उपमहाद्वीप का दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा हिस्सा हुआ करता था, शायद आज के 3% की तुलना में वैश्विक जीडीपी का 20 से 25% तक.
क्या हम इसे दोबारा पा सकते हैं? अगर हां, तो हमें क्या करना होगा?
एक बार हमें इतिहास में जाकर यह देखते हैं कि समय-समय पर कौन-से देश महाशक्ति बने, जिससे कि हम यह समझ पायें कि भारत की जरूरत क्या है?
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