फ्रांसीसी विचारक टोकेविले (Tocqueville) ने एक बार कहा था कि "समानता की क्रमिक प्रगति नियति ही है." उनका मानना था कि मानव समाज समानता के आकर्षण को रोक नहीं पायेगा और उसके खिलाफ खड़ा नहीं हो पायेगा.
समानता फ्रांसीसी क्रांति से निकली तीन प्रमुख मूल्यों में से एक थी. यह फ्रांसीसी क्रांति के प्रसिद्ध आदर्श वाक्य - "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" से स्पष्ट है.

