90 के दशक का वह दौर याद कीजिए, जब बिहार की राजनीति में एक युवा तुर्क नेता का नाम प्रकाश-पुंज की तरह चमका था और पूरे सूबे की सियासत में एकबारगी छा गया था. 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में ‘पुष्पक विमान’ से उसने पूरे बिहार का दौरा कर तूफानी चुनावी भाषण दिया था. संयोग से चुनाव चिह्न भी ‘हवाई जहाज’ ही आवंटित हुआ था. उसकी छवि एक बाहुबली नेता के रूप में उभरी थी.
उस नेता का नाम है आनंद मोहन (Anand Mohan), जिसने 1993 में ‘बिहार पीपुल्स पार्टी’ की स्थापना की थी. अगले ही साल यानी 1994 में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद ने पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा की पत्नी किशोरी सिन्हा को हराकर वैशाली संसदीय सीट से उपचुनाव जीता और लोकसभा पहुंच गईं. इसके बाद आनंद मोहन की पार्टी का जलवा बढ़ता गया.

