निश्चित तौर पर तीन बातें हैं, जो बिहार में चुनाव को लेकर स्पष्ट रूप से कही जा सकती हैं.पहली यह कि जो राजनीतिक स्थिति बन गयी है कि वह न तो स्पष्ट है और न ही संतुलित. अभी से लेकर 10 नवंबर के बीच जब वोट गिने जाएंगे और शायद उसके बाद भी ऐसी बातें हो सकती हैं जो पहले न हुई हों.
दूसरी, डबल डीलिंग का मौसम आने वाला है.पार्टियां मानेंगी कुछ और करेंगी ठीक उससे अलग. आधिकारिक रूप से गठबंधन बनेंगे, लेकिन केवल उसका उल्लंघन होगा. छिपे हुए झूठ और छिपे हुए इरादे ही इस चुनाव मौसम के पैमाने होंगे.
तीसरी बात, षडयंत्र थ्योरी को चलाने वाले बाजार अचानक खुल गये हैं- अचानक ऐसी स्थिति बनी है कि हर संभावना सराहनीय हो गयी हैं. हिन्दी में लोकप्रिय मुहावरा है- ‘मुंह में राम-राम बगल में छुरी’. यह तकरीबन सभी दलों और खासकर सत्ताधारी दलों के गठबंधन के लिए सही होने जा रहा है.
