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भारतेंदु हरिश्चंद्र: हिंदू और हिंदुस्तान की व्याख्या करने वाले साहित्यकार

Bhartendu Harishchandra को हिंदी भाषा के निर्माण में योगदान का वही श्रेय दिया जाता है, जो मीर तकी मीर को उर्दू का.

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बलिया शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक मेला लगता है जो ‘ददरी का मेला’ नाम से प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि भृगु ऋषि के शिष्य का नाम दर्दर था. दर्दर ने ही अपने गुरु की याद में एक मेले का आयोजन किया. जिसमें तमाम ऋषियों ने भाग लिया. उन्हीं शिष्य के नाम पर इस मेले का नाम ददरी का मेला पड़ा. इस मेले का वर्णन प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान ने भी किया है. मेले के बारे में कहा जाता है कि यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा मवेशी मेला है. मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम होने की परंपरा बहुत पुरानी है.

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