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बेंगलुरु वालों की दुविधा: ट्रैफिक झेलें या हरियाली का आनंद लें

Bengaluru: खुशबुओं और हरीतिमा के इस शहर के बीच एक शोर भी है-भद्दा, अशालीन और दुःख देने वाला, अंधाधुंध ट्रैफिक का.

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बेंगलुरु (Bengaluru) के साथ जुड़ी हैं सुरभियों के सम्मिलित आक्रमण की स्मृतियां. मसलन बेला फूल की सुरभि की स्मृतियां. हर नुक्कड़ पर छोटी-बड़ी दुकानों पर बेला के गुच्छे अपनी मादक सुरभि लिए हमले के लिए तैयार बैठे रहते हैं. दूसरी खुशबू है फिलटर कॉफी की. जैसी बेला के फूल की तीखी मादकता, करीब-करीब वैसी ही दुखदायी मादकता है भुनी हुई कॉफी के गहरे भूरे दानों की.

चाहे वह अमीरों का स्टारबक्स हो या घर के पास वाली कॉफी की गुमटी. और कॉफी पेश करने का अंदाज भी अलहदा. एक छोटी स्टील या पीतल की कटोरी में छोटा ग्लास और उसमें लबालब भरी हुई कॉफी.

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