श्रीश्री रविशंकर के बारे में तीन साल पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा था, ‘’आपके अंदर जिम्मेदारी की कोई भावना नहीं है. क्या आप ये सोचते हैं कि आप जो चाहे वो कह सकते हैं?’’
लेकिन 3 साल बाद देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने उन्हें आजाद भारत के सबसे बड़े विवाद की मध्यस्थता करने की जिम्मेदारी सौंपी है. जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्लाह और श्रीराम पांचू भी श्रीश्री के साथ मध्यस्थता पैनल के सदस्य होंगे.
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