अटल जी का जाना भारतीय राजनीति में एक युग का जाना है. वो युग जो वैचारिक विरोध के बाद भी बातचीत का सिलसिला नहीं तोड़ता था. जो संसद और सड़क की तीखी नोंकझोंक में भी परस्पर वैमनस्यता को जगह नहीं देता था. जो राजनीति में मतभेदों को मनभेद में नहीं बदलता था. जहां मिलकर एक भारत के निर्माण का सपना था जहां रास्ते तो अलग थे पर लक्ष्य एक था. रास्तों की कद्र थी. सपनों का सम्मान था. जहां हर अर्जुन युद्धक्षेत्र में आकर किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाता था कि सामने तो भाई बंधु हैं कैसे इन पर वार करूं.
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