नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपनी नियति के साथ साक्षात्कार के लिए अभी दो महीने और इंतजार करना होगा. क्योंकि एयर इंडिया के लिए बोली की समय सीमा अब 30 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है. अगर एयर इंडिया का निजीकरण सफल होता है तो यह राजनीतिक रूप से रणनीतिक विनिवेश के तौर पर इतिहास बनाएगा और भविष्य भी तय करेगा. इससे पहले एयर इंडिया के निजीकरण की दो बार कोशिश हो चुकी है. पहला वाजपेयी सरकार के दौर में और दूसरा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में.
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एयर इंडिया का निजीकरण: कहां हुई गलतियां और दांव पर क्या-क्या है
एयरलाइंस को बचाने का एक ही तरीका निजीकरण और कैसे सही रास्ते पर जा रही सरकार
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