रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में इंडिया एलायंस (India Alliance) की रैली 31 मार्च, रविवार को आयोजित की गई थी जिसकी निर्णायक छवि तीन महिलाओं की थी जो एक साथ बैठी थीं. ये तीनों राजनीति में उनके पतियों के कारण आईं.
सोनिया गांधी, सुनीता केजरीवाल और कल्पना सोरेन में आपस की बातचीत देख, दुनिया आश्चर्य में थी कि इनकी बातचीत क्या हुई होगी.
सोनिया गांधी जो एक पीढ़ी वरिष्ठ हैं, क्या उन्हें सलाह दे रही होगी कि अपनी-अपनी पार्टियों को एक साथ कैसे रखा जाए? या फिर, जासूसी करने वाले मीडिया से निपटने के लिए कोई नया समाधान क्या हो सकता है? या फिर एक या दो शब्द इस बारे में कि अपने पतियों की छाया से निकलकर अपने आप में एक नेता के रूप में कैसे उभरें?

