‘नहीं,ये नहीं हो सकता, अभी नहीं...लेकिन सुनिए तो,रुकिए जरा, हां, शायद...’
किसी सर्द रात में आप अपनी डेट के घर के बाहर खड़े हों और वो आपसे पूछें कि‘क्या आप एक कप कॉफी के लिए अंदर आएंगे’,तब तो ऐसा जवाब शायद जादू कर सकता है, लेकिन राजनीति में यह खतरनाक हो सकता है. इसलिए‘सवर्णों को 10 पर्सेंट आरक्षण पर’ राज्यसभा में बहस के दौरान जब एक के बाद एक धुरंधर नेताओं ने शुरू में इसे खारिज किया और बाद में समर्थन तो मैं दंग रह गया. विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने इस बहस में क्या कहा,जरा इस पर नजर डालते हैः

