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कासिम सुलेमानी की मौत पर अमेरिका से भिड़ने को क्यों तैयार है ईरान?

मिडिल ईस्ट में ईरान के बढ़े वर्चस्व के लिए सुलेमानी जिम्मेदार थे

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वीडियो एडिटर: अभिषेक शर्मा

बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में मौत के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. दोनों देशों के बीच यूं तो रिश्तों में दरार 1979 ईरानी क्रांति के बाद से कभी भर नहीं पाई, लेकिन ऐसे हालात शायद तब भी नहीं थे. ईरान जहां अमेरिकी सेना को 'आतंकी संगठन' घोषित कर चुका है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को कार्रवाई ना करने की चेतावनी दे रहे हैं.

कासिम सुलेमानी की मौत ईरान के लिए कितना बड़ा झटका है, इसका अंदाजा उनके जनाजे में शामिल हुई भीड़ से लगाया जा सकता है. 7 जनवरी को उनके जनाजे में तेहरान की सड़कों पर करीब 10 लाख लोग उमड़ पड़े थे. हालांकि, वहां भगदड़ मचने से लगभग 50 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन भीड़ का जो नजारा देखा गया उससे सुलेमानी की लोकप्रियता का अंदाजा लगता है. सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के करीबी और ईरान के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स माने जाने वाले सुलेमानी की मौत मिडिल ईस्ट में ईरान के वर्चस्व के लिए भी एक धक्का है. 

ईरान के सुप्रीम लीडर से लेकर राष्ट्रपति हसन रूहानी तक सुलेमानी की मौत का बदला लेने की बात कह चुके हैं. आर्थिक तौर पर बेहद खराब दौर का सामना कर रहा ईरान, अमेरिका को ललकार रहा है. तो सुलेमानी की मौत से ईरान को ऐसा क्या नुकसान हुआ है जिसके लिए वो दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क से भिड़ने को तैयार है.

मिडिल ईस्ट में ईरान के बढ़े वर्चस्व के लिए सुलेमानी जिम्मेदार

करीब 20 साल तक ईरान की कुद्स फोर्स के चीफ रहने के दौरान कासिम सुलेमानी ज्यादातर पर्दे के पीछे रहे थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्हें ईरान और उसके साथी देशों में एक 'हीरो' का स्टेटस मिल गया था. कई मौकों पर सुप्रीम लीडर के साथ पब्लिक में देखे जा चुके सुलेमानी ईरान की विदेश नीति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते थे. मिडिल ईस्ट में ईरान का जो वर्चस्व अभी है, उसका श्रेय सुलेमानी को ही जाता है.

यमन, लेबनान, सीरिया से लेकर अफगानिस्तान तक ईरान की प्रॉक्सी मिलिशिया खड़ी करने में सुलेमानी का ही हाथ था. इस सबके लिए अमेरिका सुलेमानी को आतंकी कहता रहा. कुछ अमेरिकी सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक सुलेमानी की मौत अमेरिका के लिए ओसामा बिन लादेन और अबू बक्र अल बगदादी को मारने से बड़ी है. क्योंकि सुलेमानी ईरान की कुद्स फोर्स के चीफ थे और एक टॉप मिलिट्री कमांडर भी, उनका मारा जाना ईरान ही नहीं, पूरे मिडिल ईस्ट के लिहाज से बहुत बड़ी घटना है. इसके जियो-पॉलिटिकल प्रभाव होने निश्चित हैं.  

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सऊदी अरब और इजरायल जैसे प्रभावशाली साथी होने के बावजूद ईरान का रीजन में इतना प्रभाव होना सुलेमानी का ही करिश्मा था. अपने इतने महत्वपूर्ण जनरल की मौत से ईरान में इस कदर बवाल मचना सामान्य लगता है.

अमेरिका ने सुलेमानी को निशाना क्यों बनाया?

जब अमेरिकी सेना 2003 में इराक में दाखिल हुई थी, तो कासिम सुलेमानी ने वहां शिया मिलिशिया तैयार की. इस मिलिशिया ने सद्दाम हुसैन को हटाए जाने के बाद बढ़ी सुन्नी इंसर्जेन्सी का मुकाबला करना शुरू किया था. अमेरिका का आरोप है कि इस मिलिशिया ने वहां मौजूद उसके सैनिकों पर अनगिनत हमले किए थे.

उस समय इराक में अमेरिकी सेना के टॉप कमांडर डेविड पेट्रिअस को सुलेमानी ने एक मैसेज भेजा था. पेट्रिअस के मुताबिक सुलेमानी ने लिखा था, "आपको पता होना चाहिए कि मैं ईरान की इराक, लेबनान, गाजा और अफगानिस्तान के लिए पॉलिसी को कंट्रोल करता हूं." ईरान में सुलेमानी को भले ही 'हीरो' माना जाता था, लेकिन अमेरिका ने उन्हें उस शख्स के रूप में देखा जिसने उसकी इराक पॉलिसी कभी कामयाब नहीं होने दी.

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