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गन्ना किसानों का ₹12 हजार करोड़ सरकार पर बकाया, नेता बोले- 'हक के लिए लड़ेंगे'

संयुक्त किसान मोर्चा समेत कई संगठनों के किसानों ने सरकार से बकाया राशि जारी कराने की मांग की है.

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सरकारी आंकड़ों में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान करने का दावा फेल साबित हो रहा है, क्योंकि करीब 12 हजार करोड़ रुपये अभी भी गन्ना किसानों का बकाया है, जिसकी किसान मांग रहे हैं. गन्ना पेराई सीजन खत्म हो चुका है. अकेले पंजाब के किसानों का 250 करोड़ रुपये बकाया है. जबकि, देश स्तर पर बकाया राशि का आंकड़ा काफी बड़ा है. संयुक्त किसान मोर्चा समेत कई संगठनों के किसानों ने सरकार से बकाया राशि जारी कराने की मांग की है.

केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी करके एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. जबकि, किसानों ने कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना एफआरपी करने की मांग की है. केंद्र की तुलना में राज्यों में ज्यादा गन्ना भाव दिया जा रहा है. ऐसे में किसानों में नाराजगी है. दूसरी तरफ, बकाया भुगतान को लेकर पंजाब के किसानों भारी रोष देखा जा रहा है.

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गन्ना बकाया भुगतान के आंकड़े

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश के किसानों की गन्ना बकाया राशि भुगतान पूरी तरह कर दी गई है. आंकड़ों के अनुसार, चीनी सीजन 2024-25 में 20 अप्रैल 2026 तक गन्ना किसानों का कुल 1,02,687 करोड़ रुपये बकाया था, जिसमें से करीब 1,02,209 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. यानी किसानों के लगभग 99.5 फीसदी बकाया चुका दिया गया है.

केंद्रीय आंकड़ों के मुताबिक, चीनी सीजन 2025-26 में 20 अप्रैल 2026 तक गन्ना किसानों का कुल 1,12,740 करोड़ रुपये बकाया था, जिसमें से करीब 99,961 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.

यानी अब तक लगभग 88.6 फीसदी बकाया चुकाया गया है. वहीं, करीब 11 फीसदी यानी लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है, जो देशभर के किसानों को दिया जाना है.

पंजाब के किसानों का 250 करोड़ बकाया

संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब ने 'किसान इंडिया' को बताया कि राज्य के गन्ना किसानों का करीब 250 करोड़ रुपये अभी बकाया है. यह राशि चीनी मिलों की ओर से किसानों को नहीं दी जा सकी है. किसान नेताओं का कहना है कि किसानों को 100 फीसदी भुगतान सुनिश्चित कराना सरकार की जिम्मेदारी है.

उन्होंने बताया कि पंजाब में गन्ने की पेराई का सीजन मार्च में खत्म हो गया था, लेकिन इसके बावजूद पूरे राज्य के गन्ना किसानों को अब भी करीब 250 करोड़ रुपये के भुगतान का इंतजार है.

भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद के नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने 'किसान इंडिया' को बताया कि पंजाब सरकार गन्ने का बकाया भुगतान नहीं कर रही है. इससे किसानों को आर्थिक परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि सरकार अगर सुनवाई नहीं करेगी तो किसानों के हक के लिए लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी.

क्यों रुका है भुगतान?

पंजाब ने गन्ने के लिए 416 रुपये प्रति क्विंटल का 'राज्य परामर्शित मूल्य' (SAP) तय किया है, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसमें से राज्य सरकार निजी मिलों को SAP का भुगतान करने में मदद के लिए 68.5 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देती है. इस सब्सिडी को जारी करने में हो रही देरी के कारण किसानों का भुगतान रुका हुआ है, जबकि मिलों ने दो महीने पहले ही अपना काम बंद कर दिया था.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक निजी मिलों ने किसानों को पहले ही लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है, लेकिन लगभग 250 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी बाकी है. सहकारी क्षेत्र में 392 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि लगभग 303 करोड़ रुपये का बकाया अभी भी चुकाया जाना बाकी है.

चीनी इंडस्ट्री ने क्या कहा?

चीनी उद्योग के शीर्ष निकाय इस्मा ने बयान में कहा कि केंद्र ने गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी कर दी है. लेकिन, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में 6 साल से बढ़ोत्तरी नहीं की गई है. जबकि, इथेनॉल खरीद कीमतों को भी संशोधित नहीं किया गया है. ऐसे में चीनी मिलों को किसानों को गन्ना मूल्य का बढ़ा हुआ भुगतान करना पड़ता है. जबकि, उनकी चीनी और इथेनॉल को पहले की कीमतों पर ही ओएमसी के जरिए खरीदा जाता है. ऐसे में चीनी मिलों पर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है और कई चीनी मिलें किसानों का भुगतान नहीं कर पा रही हैं. सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) और इथेनॉल खरीद मूल्यों को गन्ने के संशोधित FRP के साथ तालमेल बिठाना जरूरी है.

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