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"हम बीमार हैं, हमें भारी काम करना पड़ रहा": रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय युवक

रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में फंसे सात भारतीय युवकों ने बीमारी और चिकित्सा उपचार की कमी का सामना करते हुए मदद की गुहार लगाई है.

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Russia-Ukraine War: "यार एथे तबियत बहुत खराब हो रही ए... बोहत बुरी हालत ना दवा मिलिदी... एथे (हम यहां बहुत बीमार हो रहे हैं. हमारी हालत बहुत खराब है, हमें यहां कोई दवा नहीं मिलती)."

"हो सकदा सानु अथो जल्दी कुडवा लाओ (यदि आप कर सकते हैं, तो कृपया हमें जल्द ही यहां से बाहर निकालें)"

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23 साल की गगनदीप डरे हुए हैं. व्हाट्सएप पर क्विंट हिंदी से बात करते हुए, उन्होंने अधिकारियों से उन्हें और अन्य भारतीयों को एक ऐसे युद्ध से बचाने की गुहार लगाई, जो लड़ने के लिए उनका नहीं है.

गगनदीप और छह अन्य भारतीयों को अपने घरों से मीलों दूर रूस-यूक्रेन युद्ध लड़ने के लिए "मजबूर" किया जा रहा है, क्योंकि एक ट्रैवल एजेंट ने कथित तौर पर उन्हें 'हेल्पर' के रूप में रूसी सेना में शामिल होने का बोलकर "धोखे" से शामिल कर दिया.

सात लोगों - पांच पंजाब से और दो हरियाणा से - ने 3 और 4 मार्च को दो वीडियो जारी किए थे, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं. इसमें भारत सरकार से उन्हें घर वापस लाने की गुहार लगाई है.

क्विंट हिंदी ने 7 मार्च को विस्तार से बताया था कि कैसे रूसी सेना ने कथित तौर पर उन्हें अपने साथ एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने के लिए "मजबूर" किया था. इन युवाओं को एक ट्रैवल एजेंट ने "धोखा" दिया था और "पर्यटन" के बहाने बेलारूस में "फंसे" छोड़ दिया था.

अब खुलासा किया कि उन्हें उचित चिकित्सा उपचार नहीं मिल रहा है, उनसे "भारी काम" कराया जा रहा है और वे भारत वापस आने के लिए चिंतित हैं.

'बंकरों में रखा गया, बुखार है, उल्टी हो रही है'

गगनदीप पंजाब के गुरदासपुर के देहरीवाल किरण गांव के रहने वाले हैं.

9 मार्च को शाम करीब 6.30 बजे व्हाट्सएप पर क्विंट हिंदी से बात करते हुए गगनदीप ने खुलासा किया कि वह अभी भी यूक्रेन में फंसा हुए हैं.

जैसा कि क्विंट हिंदी ने पहले बताया था, उन्हें और छह अन्य लोगों को डोनेट्स्क क्षेत्र के फ्रंटलाइन से वापस लाया गया है, लेकिन वे अभी भी यूक्रेन में एक आर्मी ट्रेनिंग कैंप में हैं.

उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर गगनदीप ने कहा कि उनकी हालत बहुत खराब है और अधिकारियों से उन्हें कोई दवा नहीं मिल रही है.

उन्होंने खुलासा किया, “हमें बुखार और उल्टी हो रही है". उन्होंने कहा कि उन्हें किसी जगह पर बंकरों में रखा जा रहा था जो एक खाली जगह लगता है.

बातचीत के दौरान उन्होंने जानकारी मांगी कि भारतीय अधिकारी उनकी रिहाई के बारे में क्या कह रहे हैं.

चिंतित गगनदीप ने क्विंट हिंदी से पूछा, "सर, क्या आपको दूतावास या किसी और से कुछ पता चला, वे हमें यहां से कब तक बचाएंगे?" .

यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय दूतावास से किसी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, उन्होंने कहा: "हमने (रूस में) भारतीय दूतावास को फोन किया. उन्होंने हमें बताया कि उन्होंने हमारे मामले के संबंध में एक मेल भेजा है. उन्होंने हमें बताया 'जब एक जवाब आता है, हम आपको बता देंगे'.'

गगनदीप ने कहा, "लेकिन हमारी हालत यहां बहुत खराब हो रही है. यदि आप कर सकते हैं, तो कृपया हमें जल्द से जल्द बाहर निकालें."

रूसी सेना में उनके 'वरिष्ठों' ने भी उन्हें इस बारे में कुछ नहीं बताया है कि उन्हें रिहा किया जा रहा है या नहीं.

उन्होंने साझा किया, "वे हमें कुछ नहीं बताते. इसके अलावा, हम उनकी भाषा (रूसी) भी नहीं समझ सकते."

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    9 मार्च को गगनदीप से वाट्सऐप पर बातचीत का स्क्रीनशॉट.

    (फोटो: क्विंट हिंदी)

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    9 मार्च को गगनदीप से वाट्सऐप पर बातचीत का स्क्रीनशॉट.

    (फोटो: क्विंट हिंदी)

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    9 मार्च को गगनदीप से वाट्सऐप पर बातचीत का स्क्रीनशॉट.

    (फोटो: क्विंट हिंदी)

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'अस्वस्थ हूं, भारी काम करना पड़ रहा है'

7 और 8 मार्च को क्विंट हिंदी ने गगनदीप के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर फंसे करनाल निवासी 20 वर्षीय हर्ष कुमार से भी बात की.

हर्ष ने ही 4 मार्च को सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा दूसरा वीडियो जारी किया था.

उन्होंने पहले क्विंट हिंदी को व्हाट्सएप पर भी बताया था कि वह "जल्द से जल्द घर वापस आना चाहते हैं".

उन्होंने कहा था, "भावनाएं तो यही हैं कि भाई के जल्दी सा जल्दी अपना देश वापस आ जाएगा."

अब उन्होंने खुलासा किया है कि वह भी काफी बीमार हैं और रूसी सेना के अधिकारी उनसे 'भारी काम' करा रहे हैं.

उन्होंने भी पुष्टि की है कि उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास किसी सैन्य प्रशिक्षण शिविर में रखा जा रहा है.

जब उनसे पूछा गया कि कैंप में उनसे किस तरह का काम कराया जा रहा है, तो उन्होंने कहा, 'सर पहले प्रशिक्षण दिया जा रहा था, अब बहुत भारी भरकम काम कराया जा रहा है.'"

हालांकि, अभी यह पता नहीं चल सका कि उनसे किस प्रकार का "भारी काम" कराया जा रहा है.

भारतीयों को बचाने की कोशिश जारी: MEA

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि वह "रूस में फंसे" भारतीय नागरिकों को बचाने की पूरी कोशिश कर रहा है.

8 मार्च को प्रेस को जानकारी देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने भी यहां और विदेशों में भारतीयों को "ऐसे रूसी सेना नौकरी घोटालों के झांसे में न आने" के लिए आगाह किया था.

यह रूस-यूक्रेन युद्ध में दो भारतीय नागरिकों - हैदराबाद के मोहम्मद असफान और गुजरात के हेमिल मंगुकिया - की मौत के बाद आया है.

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि रूस में फंसे कम से कम "20 भारतीयों" ने बचाव के लिए भारत सरकार से संपर्क किया था.

क्विंट हिंदी ने टिप्पणी के लिए भारत में रूसी दूतावास से भी संपर्क किया है. यदि उनसे कोई प्रतिक्रिया मिलती है, तो उसे इस स्टोरी में जोड़ा जाएगा.

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