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‘दलित’ शब्द आया कहां से, क्या आपके पास है इसका जवाब?

शूद्र , अछूत, हरिजन और फिर दलित- किसने दिया इंडिया को दलित शब्द?

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क्या आपको पता है कि ‘दलित’ शब्द कहां से आया है? किसने इस शब्द को सबसे पहले इस्तेमाल किया? किसने इस शब्द को समाज के पिछड़े तबके से जोड़ा?

इस स्टोरी में हम इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे. आपको बता दें कि ये रिपोर्ट दलित चिंतकों, रिसर्चर, प्रोफेसर्स, वरिष्ठ पत्रकारों और समाजिक कार्यकर्ताओं से की गई बातचीत पर आधारित है.

अक्सर आप अखबार के पहले या फिर बीच के पन्नों में दलितों पर हो रही हिंसा की खबरें देखते होंगे. क्विंट हिंदी भी दलितों के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाता रहा है. लेकिन इस बीच हमने एक कोशिश की है ‘दलित’ शब्द के इतिहास को टटोलने की.

दलित शब्द का जिक्र

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विवेक कुमार बताते हैं कि दलित शब्द का जिक्र सबसे पहले 1831 की मोल्सवर्थ डिक्शनरी में पाया जाता है. फिर बाबा भीमराव अंबेडकर ने भी इस शब्द को अपने भाषणों में प्रयोग किया.

कुछ जानकार बताते हैं कि 1921 से 1926 के बीच ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल ‘स्वामी श्रद्धानंद’ ने भी किया था. दिल्ली में दलितोद्धार सभा बनाकर उन्होंने दलितों को सामाजिक स्वीकृति की वकालत की थी.

दलित शब्द का संविधान में कोई जिक्र नहीं
2008 में नेशनल एससी कमीशन ने सारे राज्यों को निर्देश दिया था कि राज्य अपने आधिकारिक दस्तावेजों में दलित शब्द का इस्तेमाल न करें. 

दलित पैंथर्स ने दिया पिछड़ों को नया नाम

साल 1972 में महाराष्ट्र में दलित पैंथर्स मुंबई नाम का एक सामाजिक-राजनीतिक संगठन बनाया गया. आगे चलकर इसी संगठन ने एक आंदोलन का रूप ले लिया.

नामदेव ढसाल, राजा ढाले और अरुण कांबले इसके शुरुआती प्रमुख नेताओं में शामिल हैं. इसका गठन अफ्रीकी-अमेरिकी ब्‍लैक पैंथर आंदोलन से प्रभावित होकर किया गया था.

यहीं से ‘दलित’ शब्द को महाराष्ट्र में सामाजिक स्वीकृति मिल गई. लेकिन अभी तक दलित शब्द उत्तर भारत में प्रचलित नहीं हुआ था.

नॉर्थ इंडिया में दलित शब्द को प्रचलित कांशीराम ने किया. DS4 जिसका मतलब है दलित शोषित समाज संघर्ष समिति. इसका गठन कांशीराम ने किया था और महाराष्ट्र के बाद नॉर्थ इंडिया में अब पिछड़ों और अति-पिछड़ों को दलित कहा जाने लगा था.
चंद्रभान प्रसाद, दलित चिंतक
ठाकुर, ब्राह्मण, बनिया छोड़ बाकी सब DS4 - कांशीराम का नारा
लंबे समय से ये शब्द इस्तेमाल में रहा है, लेकिन इसका पॉपुलर इस्तेमाल दलित पैंथर्स ने ही किया. अंबेडकर ज्यादातर डिप्रेस्ड क्लास शब्द का ही इस्तेमाल करते थे, अंग्रेज भी इसी शब्द का इस्तेमाल करते थे और फिर यहीं से ‘दलित’ शब्द बना.
विवेक कुमार, प्रोफेसर, सोशल सिस्टम और सोशल साइंस सेंटर, जेएनयू

1929 में लिखी एक कविता में राष्ट्रकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने भी ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जो इस बात की पुष्टि करता है कि ये शब्द प्रचलन में तो था, लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं किया जाता था. 1943 में ‘अणिमा’ नाम के काव्य संग्रह में उनकी ये कविता छपी.

Snapshot

दलित जन पर करो करुणा।
दीनता पर उतर आये प्रभु,
तुम्हारी शक्ति वरुणा।

राजनीतिक विश्लेषक और रिसर्चर मनीषा प्रियम कहती हैं कि ‘दलित’ शब्द दरअसल लोकभाषा के शब्द दरिद्र से आया है. किसी जाति विशेष से ये शब्द नहीं जुड़ा है इसलिए इसे स्वीकृति भी बड़े पैमाने पर मिली.

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