मध्य प्रदेश के साथ ही देश में चावल का स्टॉक तय लिमिट से अधिक रहने वाला है और कीमतें भी स्थिर रहने वाली हैं. इसकी वजह है टारगेट से अधिक धान खरीद पूरी होना. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ में किसानों से भरपूर धान की खरीद की गई है. मध्य प्रदेश में तो तय टारगेट से अधिक धान खरीद पूरी हुई है.
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खरीद केंद्रों के जरिए अंतिम तिथि 20 जनवरी तक पिछले साल की तुलना में 8 लाख मीट्रिक टन अधिक धान की खरीद की है, जो धान खरीद का नया रिकॉर्ड है. वहीं, राज्य के 7 लाख से अधिक किसानों के खाते में धान खरीद के भुगतान के रूप में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि ट्रांसफर की गई है. मंडियों और खरीद केंद्रों पर पहुंची किसानों की उपज का 84 फीसदी के करीब उठान भी हो चुका है.
मध्य प्रदेश में टारगेट के पार पहुंची धान खरीद
मध्य प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार इस साल धान खरीदी अभियान बहुत सफल रहा है. तय समय सीमा में लक्ष्य से अधिक धान की खरीद की गई है. मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 के लिए 46 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था. सरकारी खरीद केंद्रों पर इस बार किसानों ने अपनी उपज को जमकर बेचा है और यही वजह है कि इस बार खरीद की अंतिम तिथि 20 जनवरी तक 51.75 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है.
7 लाख से अधिक किसानों के खाते में भेजे गए 9485 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि 20 जनवरी तक इस साल धान की खरीदी 51 लाख 75 हजार मीट्रिक टन हो गई है, जो बीते साल से 8 लाख 22 हजार टन अधिक है. इस खरीद से 7 लाख 62 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिला. किसानों को अब तक 9485 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया जा चुका है.
1436 केंद्रों पर खरीदी गई 84 फीसदी धान का उठान पूरा
मध्य प्रदेश में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल पर उपज बिक्री के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था. राज्य आंकड़ों के अनुसार 8 लाख से अधिक किसानों ने अपनी उपज बिक्री करने की इच्छा जताते हुए पंजीकरण कराए थे. धान खरीद के लिए किसानों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सितंबर 2025 में शुरू की गई थी. इस साल 1436 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी पूरी की गई. खरीदी गई 84 फीसदी धान की मात्रा सफलतापूर्वक उठान हो चुका है. हालांकि, कुछ किसानों ने शिकायत की थी कि उन्हें अपनी उपज का पैसा नहीं मिला है. ऐसे किसानों को भी राशि भेजी जा रही है. ये वही किसान हैं जिनकी उपज का उठान सरकारी खरीद केंद्रों से नहीं हो पाया है. क्योंकि, अभी भी करीब 15 फीसदी धान का उठान होना बाकी है.
केंद्रीय भंडार में तय लिमिट से कई गुना धान का स्टॉक
जनवरी 2026 में एफसीआई समेत अन्य सरकारी भंडारण समितियों के पास 630 लाख टन धान का स्टॉक बना हुआ है. जबकि, मौजूदा समय तक 76 लाख मीट्रिक टन स्टॉक होना चाहिए था. यानी कई गुना ज्यादा धान का स्टॉक केंद्रीय भंडारण में है. अभी कई राज्यों में धान की खरीद चल रही है और रबी सीजन में भी धान की बुवाई का रकबा 26 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया है, जो बीते साल की तुलना में 5 लाख हेक्टेयर अधिक है. वहीं, रबी सीजन में धान की बुवाई 25.58 लाख हेक्टेयर में की गई है जो बीते साल 20.98 लाख हेक्टेयर में की गई थी, इस हिसाब से धान का रकबा करीब 5 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है. यानी देश में चावल उत्पादन भरपूर रहने वाला है.
भरपूर स्टॉक से दोहरा फायदा
कृषि जानकारों का कहना है कि धान की भरपूर खरीद किए जाने से किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिला है तो वहीं, बाजार में चावल सप्लाई बराबर बनी रहेगी, जिससे कीमतें स्थिर रहने की संभावना को बल मिला है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी धान की भरपूर खरीद इस सीजन की गई है. बता दें कि 2022 और 2023 में घरेलू खपत पूरी करने के लिए चावल के निर्यात पर केंद्र ने रोक लगाई थी, जिसे बाद में हटा लिया गया था. वहीं, इस सीजन भी तय लिमिट से अधिक उत्पादन और खरीद के चलते चावल निर्यात भी भरपूर होने वाला है. वैश्विक खपत का 40 फीसदी चावल अकेले भारत पूरा करता है.