हरियाणा में भारतीय किसान एकता ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध किया है. बीकेयू के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार किसान विरोधी नीतियां लागू कर रही. वह डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी का पुतला फूकेंगे. इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आवास पर 3 दिन का पड़ाव डालेंगे. भारतीय किसान एकता के नेताओं ने कहा कि सरकार ने गुप्त तरीके से अमेरिका के साथ समझौता किया है और अस्पष्ट बयान जारी किए जा रहे हैं.
भारतीय किसान एकता के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने सिरसा ने बताया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के अलावा एफटीए के विरोध में 17 फरवरी को दोपहर 1 बजे उपायुक्त कार्यालय सिरसा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका जाएगा. इसके साथ-साथ हरियाणा सरकार की ओर से बुढ़ापा पेंशन काटने के विरोध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भी पुतला फूंका जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार अगर ऐसे ही किसान विरोध नीतियां लाती रही तो किसान फिर से देशव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
"गुप्त समझौता किया गया और अस्पष्ट बयान जारी किए जा रहे"
किसान नेता ने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार समझौता गुप्त रूप से बातचीत करके किया गया और इसकी शर्तों का खुलासा नहीं किया गया. इसके बजाय केवल अस्पष्ट बयान जारी किए गए, क्योंकि भारतीय पक्ष से जुड़े लोगों को यह समझ थी कि पूरी जानकारी सार्वजनिक करने से देश को राजनीतिक और आर्थिक नुकसान हो सकता है. इतनी दूरगामी आर्थिक और संप्रभुता से जुड़ी शर्तों वाले समझौते में पारदर्शिता की कमी बेहद चिंताजनक है.
"न्यूजीलैंड, आसियान समझौतों से किसानों को चौतरफा घेरा जा रहा"
बीकेई नेताओं ने कहा कि अमेरिकी कृषि सचिव का यह बयान भी इस बात का प्रमाण है कि भारत ने कृषि वस्तुओं के आयात पर सहमति जताई है. यह विरोधाभास ही दर्शाता है कि वाणिज्य मंत्री के बयान भ्रामक थे और इससे सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं. सबसे बड़ी समस्या इस समझौते में पारदर्शिता की कमी है, जिन लोगों ने दावा किया था कि न्यूजीलैंड के साथ समझौते में कृषि को शामिल नहीं किया गया. उन्होंने बाद में चुपचाप सेब पर आयात शुल्क 25 फीसदी कम कर दिया. इसी प्रकार आसियान समझौते के तहत तय पाम ऑयल के आयात शुल्क को कई बार कम किया गया. जी-20 की सफलता के नाम पर अमेरिका से सेब, बादाम और अखरोट पर आयात शुल्क चुपचाप घटा दिया गया. बीजेपी सरकार बिजली शोध बिल 2025, सीड्स बिल व एफटीए के माध्यम से किसानों को चौतरफा घेर रही है.
किसान विरोधी कानून लाने का मतलब है सरकार नफरत करती है - गुरप्रीत सिंह
किसान नेता गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि बीजेपी सरकार किसानों से नफरत करती है, इसीलिए नए-नए किसान विरोधी कानून लेकर आ रही है और अमेरिका सहित अन्य देशों से किसानी को बर्बाद करने वाले समझौते कर रही है. बयान में कहा गया कि किसान आंदोलन पार्ट-1 और पार्ट-2 की मांगों को लेकर किस समय-समय पर आंदोलन कर रहे हैं. लिखित रूप में मानी हुई मांगों को भी अभी तक लागू नहीं किया गया है. एमएसपी गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग सी2+50 प्रतिशत के तहत फसलों के भाव, किसानों मजदूरों की संपूर्ण कर्जा माफी सहित किसानों की मांगों को मानने की बजाय केंद्र सरकार किसान विरोधी नए-नए फरमान सुना रही है. केंद्र सरकार ने 2025-26 के बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने की घोषणा की थी, जिसका अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है.
किसान संगठन हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर किसानों-मजदूरों की संपूर्ण कर्जा माफी सहित सभी मांगों को लेकर 23, 24 और 25 फरवरी को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास के बाहर लगने जा रहे महापड़ाव में बीकेई के बैनर तले बड़ी संख्या में सिरसा से किसान-मजदूर पहुंचेंगे. वहीं हरियाणा सरकार की ओर से बुजुर्गों की काटी गई बुढ़ापा पेंशन को भी बहाल करवाया जाएगा. किसान नेता सुभाष झोरड़ ने कहा कि 1987 में चौधरी देवीलाल ने किसानों की बुढ़ापा पेंशन शुरू की थी, लेकिन मौजूदा सरकार बुढ़ापा पेंशन काटने का काम कर रही है. किसान नेताओं ने कहा कि सरकार इस तरह से किसान विरोधी नए कानून लाकर परेशान कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि फिर से किसान आंदोलन के लिए किसानों-मजदूरों को मजबूर न किए जाए.
