“मुझे ठहरने की जगह बुक करने में या यूं कहिए बुक की हुई जगह पर ठहरने के लिए बहुत बुरे अनुभव से गुजरना पड़ा.”
स्टैंडअप कॉमेडियन और एक्टिविस्ट स्वेता मंत्री (Sweta Mantrii) ने सिटिजन जर्नलिस्ट बनकर बताया कि उन्हें हॉस्टल में ठहरने के लिए कितनी मुसीबत झेलनी पड़ी. स्वेता मंत्री एक स्टैंडअप कॉमेडियन हैं और दिव्यांगों के लिए लड़ने वाली एक्टिविज्म करती हैं.
मैंने नमस्ते मुंबई बैकपैकर्स में एक बंक बेड बुक की थी. मैंने महिला डॉर्मेट्री में एक बेड बुक की थी. बुक करते समय मुझे ये दिक्कत आई कि ऑप्शन में कोई लोअर बेड नहीं था. इसलिए मैंने अपर बेड बुक की. मुझे लगा कि जरूर कोई न कोई एक-दो रात के लिए बेड बदल लेगा. मैंने बुकिंग के बाद हॉस्टल को फोन करके शौचलय आने-जाने की सुविधाओं के बारे में पूछा. उन्होंने मुझे बताया कि स्टाफ होगा या नहीं होगा लेकिन कोई साफ-सफाई में मदद जरूर कर देगा.स्वेता मंत्री, स्टैंडअप कॉमेडियन और एक्टिविस्ट
स्वेता मंत्री कहती हैं कि जब मैं वहां पहुंची तो मैनेजर ने कहा कि मेरे लिए वहां ठहरना मुश्किल होगा. उसने कहा कि चूंकि मैंने अपर बेड बुक किया था तो कोई लोअर बेड नहीं है. मैंने उनसे कहा कि क्या वो किसी से बेड बदलने के लिए आग्रह कर सकते हैं. तो उन्होंने कहा कि मसला लोअर बेड का नहीं है, मसला ये है कि मैं वहां आराम से ठहर ही नहीं पाऊंगी.
इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर आपको कोई दिक्कत नहीं भी होगी तो भी बाकी लोग सहज नहीं होंगे. ये सुनकर मैं दंग रह गई. मेरा दिमाग गुम हो गया. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरे कारण कोई असहज हो जाएगा.
क्विंट से बात करते हुए नमस्ते मुंबई बैकपैकर्स के मैनेजर अबुल चौधरी ने बताया कि बुकिंग साइट (Booking.com) पर साफ लिखा था कि ये हॉस्टल दिव्यांगों के लिए ठीक नहीं है. हमने स्वेता को इसलिए जगह नहीं दी क्योंकि कोई लोअर बेड नहीं था.
हम कोशिश कर रहे हैं हमारा हॉस्टल दिव्यांगों के लायक बन जाए लेकिन हमारी भी सीमाएं हैं क्योंकि इमारत पुरानी है.अबुल चौधरी, मैनेजर, NMB
क्विंट ने हॉस्टल के बारे में वेबसाइट चेक की लेकिन हमें दिव्यांगों को सुविधाओं पर कोई जानकारी नहीं मिली.
"उन्हें माफी मांगनी चाहिए"
स्वेता मंत्री कहती हैं कि दलील देने के बजाय उन्हें माफी मांगनी चाहिए क्योंकि रात को एक दिव्यांग को हॉस्टल से जाने के लिए आप किसी भी हालत में नहीं कह सकते, नहीं कहना चाहिए. मैं दिव्यांग होने का फायदा नहीं उठा रही, लेकिन मुझे वाकई चीजों में दिक्कत होती है.
मेरे साथ जैसा बर्ताव किया गया, उसके लिए मुझे कम से कम एक सॉरी तो मिलनी चाहिए. ये अमानवीय और अवांछित. मैं थोड़ी सी मदद के साथ वहां एक रात तो गुजार ही सकती थी.स्वेता मंत्री, स्टैंडअप कॉमेडियन और एक्टिविस्ट