15 नवंबर, मंगलवार को ऑक्सफोर्ड एकेडमिक में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चलता है कि दुनिया भर के पुरुषों में स्पर्म काउंट और स्पर्म कॉन्सन्ट्रेशन घट रहा है. यह भारत में भी देखा गया है.
यह क्यों मायने रखता है: स्टडी के अनुसार निकट भविष्य में रिप्रोडक्टिव क्राइसिस आ सकता है. शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर स्पर्म कॉन्सन्ट्रेशन 40 मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम हो जाता है, तो यह प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है. इससे पुरुषों में टेस्टिकुलर कैंसर और जेनिटल बर्थ डिफेक्ट में भी वृद्धि हो सकती है.

