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सेमाग्लूटाइड की हाई डोज भारतीयों में भी वजन घटाने में सहायक है: लैंसेट स्टडी

डायबिटीज और वजन घटाने के लिए सेमाग्लूटाइड के इस्तेमाल पर अधिक जानकारी देते स्टडी के रिसर्चर.

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लैंसेट की एक नई स्टडी के अनुसार, सेमाग्लूटाइड का हाई डोज ब्लड शुगर लेवल को कम करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मदद कर सकता है. फिलहाल निर्धारित ओरल सेमाग्लूटाइड की अप्रूव्ड हाई डोस 14 mg है. स्टडी के प्रमुख जांचकर्ताओं में से एक ने बताया कि स्टडी से पता चलता है कि दवा 25 मिलीग्राम और 50 मिलीग्राम की हाई डोस में भी उपयोगी और सुरक्षित है.

फिट ने फोर्टिस अस्पताल, मोहाली के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के निदेशक और शोधकर्ता डॉ. केपी सिंह से इस स्टडी के बारे में बात की.

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फायदा और साइड इफेक्ट्स : स्टडी में क्या पाया गया

यह स्टडी भारतीयों को शामिल करने वाली पहली स्टडी भी है.

स्टडी के कुछ प्रमुख मापदंडों के बारे में फिट से बात करते हुए डॉ. केपी सिंह कहते हैं,

  • यह स्टडी पांच वर्षों तक आयोजित किया गया

  • यह भारत सहित एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के नौ देशों में आयोजित एक बहुराष्ट्रीय स्टडी थी

  • स्टडी में 709 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें से 216 प्रतिभागी भारत से थे.

  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्टडी से बाहर रखा गया.

  • स्टडी में प्रतिभागियों को लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ, 68 सप्ताह तक हर दिन खाने को एक गोली दी गई.

  • यह पहली बार है कि क्लिनिकल ट्रायल्स में सेमाग्लूटाइड (25 मिलीग्राम और 50 मिलीग्राम) की हाई डोस को टेस्ट किया गया.

इससे पहले हमने ट्रायल्स में भी केवल 14 मिलीग्राम तक ही इसका इस्तेमाल किया था और इस खुराक में दवा से डायबिटीज रोगियों का ब्लड शुगर कंट्रोल के साथ-साथ 5 से 8% वजन कम हुआ.
  • इस अध्ययन में पाया गया कि दवा की हाई डोज देने से 68 सप्ताह की अवधि में 15% तक वजन घटाने में सहायता मिल सकती है.

  • स्टडी में भाग लेने वाले दो-तिहाई से अधिक प्रतिभागियों ने कम से कम 10% वजन कम किया।

साइड इफेक्ट्स के बारे में क्या?

स्टडी में पाया गया कि ट्रायल में लगभग 92% प्रतिभागियों ने प्रतिकूल प्रभाव का अनुभव किया, जबकि प्लेसीबो समूह में 86% ने प्रतिकूल प्रभाव का अनुभव किया.

स्टडी के लेखकों के अनुसार, साइड इफेक्ट के रूप में होते हैं हल्के से मध्यम गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, जिसमें दस्त और मतली भी शामिल है.

क्या सेमाग्लूटाइड भारत में उपलब्ध है?

इंजेक्टेबल सेमाग्लूटाइड (सबसे लोकप्रिय प्रकार ओज़ेम्पिक है) अभी भारत में उपलब्ध नहीं है लेकिन ओरल सेमाग्लूटाइड भारत में एक वर्ष से अधिक समय से उपलब्ध है.

यह 3, 7 और 14 मिलीग्राम खुराक में के रूप में उपलब्ध है. हालांकि वे केवल डायबिटीज के खास मामलों के लिए प्रीस्क्राइब किए जाते हैं.

भारत के ड्रग्स कंट्रोल जनरल के अनुसार, भारत में सेमाग्लूटाइड केवल एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट द्वारा निर्धारित किया जा सकता है. इसके अलावा, उन्हें वयस्कों में केवल अनकंट्रोल्ड डायबिटीज के इलाज के लिए दिया जा सकता है.

इसके अलावा, भारत में ओरल सेमाग्लूटाइड गोलियां सस्ती नहीं हैं, इनकी कीमत 300 रुपये प्रति गोली है. यह ध्यान में रखते हुए कि आपको गोली हर दिन लेने की आवश्यकता है, इसका खर्च हर महीने 10,000 रुपये तक हो सकता है.

पैंक्रियाटिस और गुर्दे की डैमेज के जोखिम वाले लोगों को यह दवा नहीं दी जानी चाहिए, भले ही वे इस दवा को खाने वालों की कैटेगरी से मिलते हों.

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वजन घटाने के लिए सेमाग्लूटाइड्स

भारत में, इंजेक्शन या ओरल रूप में ये दवा, लोगों में वजन घटाने के लिए नहीं दे जा सकती है, जो डायबिटीज के शिकार नहीं हैं.

डॉ. सिंह कहते हैं, "कुछ लोग इसे लेबल से हटा देते हैं, लेकिन हम उन्हें कानून तौर पर ये दवा प्रीस्क्राइब नहीं कर सकते."

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के अध्ययनों में पॉजिटिव रिजल्ट इसकी मंजूरी के लिए एक मजबूत मामला बनाते हैं.

ओज़ेम्पिक और सेमाग्लूटाइड्स दवा का वजन घटाने के लिए असरदार साबित होने की बात ऑनलाइन शुरू होने से इसकी मांग बढ़ गई है लेकिन, एक्सपर्ट्स सावधान हैं.

गुर्दे की क्षति के अलावा, सेमाग्लूटाइड को थायरॉयड ट्यूमर, हाइपोग्लाइसीमिया और एलर्जी रिएक्शन में होने वाली वृद्धि से भी जोड़ा गया है.

फिट ने जिन एक्सपर्ट्स से बात की उनके अनुसार, इन संभावित साइड इफेक्ट्स के कारण, केवल वजन घटाने के लिए इसका उपयोग करना जोखिम उठाने लायक नहीं लगता है.

हालांकि, डॉ. सिंह कहते हैं, "हमें अपने स्टडी प्रतिभागियों में हाइपोग्लाइसीमिया नहीं मिला."

डॉ. सिंह का मानना ​​है कि जब सेमाग्लूटाइड के संभावित लाभों की बात आती है, तो हम केवल सतही तौर पर ही काम कर रहे हैं. हालांकि, क्लिनिकल ट्रायल्स में उनका टेस्ट किया जाना बाकी है.

डॉ. सिंह कहते हैं, "हम हृदय संबंधी समस्याओं और गैर-अल्कोहल फैटी लीवर रोग (एनएएफएलडी) जैसी दूसरी बीमारियों में भी सेमाग्लूटाइड का टेस्ट कर रहे हैं. यह कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन वे आशाजनक दिख रहे हैं."

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