पिछले दो साल से पूरी दुनिया कोविड महामारी और उसके कारण होने वाली समस्याओं से जूझ रही है. जिसकी वजह से, पहले से मौजूद पुरानी बीमारियों से हमारा ध्यान भटक रहा है. यह बीमारियाँ हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित या खराब तो करती ही हैं, साथ में हमें विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं.
बीमारियों की सूची में डायबिटीज का स्थान सबसे ऊपर है. उच्च डायबिटीज आबादी (लैंसेट) वाले दुनिया के तीन देशों में भारत भी शामिल है. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आईडीएफ) के अनुसार, भारत में 20-70 वर्ष के आयु वर्ग में डायबिटीज के मामले साल 2015 में लगभग 7 करोड़ थे और यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. इसका मतलब यह है कि डायबिटीज, फर्टिलिटी आयु वर्ग वाले भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहा है.
मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल के गायनेकोलॉजिस्ट और इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ हृषिकेश पाई, इस विषय पर विस्तार से बता रहे है.

