बतौर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कार्यकाल आजाद भारत का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर रहा है. भारत पिछले डेढ़ साल से कोरोना वायरस संकट (Corona Crisis) का सामना कर रहा है और स्वास्थ्य मंत्रालय वायरस के खिलाफ इस पूरी जंग के केंद्र में रहा है. भारत में कोरोना वायरस की एंट्री 30 जनवरी 2020 को हुई और तब से परिस्थितियां बदलना शुरू हो गईं. कोरोना का प्रकोप दुनियाभर में दिखा लेकिन भारत का रिस्पॉन्स सुस्त दिखा.
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ऑक्सीजन, बेड और वैक्सीन की कमी के लिए क्या सिर्फ डॉ. हर्षवर्धन जिम्मेदार थे?
कोरोना संकट के करीब डेढ़ साल बाद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया

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