हाल ही में दिल्ली सरकार के गुरु तेग बहादुर अस्पताल ने ‘हैप्पीनेस थेरेपी’ का प्रयोग शुरू किया है. इसने एक बार फिर उस अंतर पर जोर दिया कि हमारे नीति निर्माता क्या करने के लिए तैयार हैं और जमीनी तौर पर उन्हें क्या करने की जरूरत है.
दिल्ली के स्वास्थ मंत्री सत्येंद्र जैन ने गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत मैटरनिटी वॉर्ड से की. रोगियों के जल्द ठीक होने और उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार के लिए इसे दूसरे विभागों में भी शुरू किया जाएगा. इमरजेंसी और आईसीयू को इससे अलग रखा गया है. इस कार्यक्रम का मकसद रोगियों के अनुभवों में सुधार और डॉक्टरों व सहयोगी स्टाफ के साथ मरीजों के रिश्तों को बेहतर बनाना है.
बिना सोचे-समझे और जल्दबाजी में शुरू किए प्रयोग को सत्ता का बौद्धिक दिवालियापन ही कहा जा सकता है. वास्तव में जिनके पास हेल्थकेयर देने की जिम्मेदारी है और जिन्हें जमीनी तौर पर इसे प्रदान करना है, उनके बीच सामंजस्य का ऐसा अभाव है, जिसे खत्म करना मुश्किल है.

