ADVERTISEMENTREMOVE AD
Members Only
lock close icon

क्या हमारी परवरिश बचपन से ही बच्चों को लैंगिक भेदभाव सिखा रही है?

तुम लड़की, वो लड़का, जेंडर स्टीरियोटाइप की शुरूआत बचपन से ही हो जाती है

story-hero-img
i
Aa
Aa
Small
Aa
Medium
Aa
Large

(6 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. फिट हिन्दी बच्चों पर लिंग भेद-भाव के खराब प्रभावों पर लिखे इस लेख को फिर से प्रकाशित कर रहा है.)

मैं तीन साल की बच्ची की मां हूं और यह देख कर दंग हूं कि मीडिया और समाज के जरिए हमारे बच्चों पर किस तरह लैंगिक भेद करने वाली सूचनाएं थोपी जा रही हैं, और उनके लिए पहचान, अभिव्यक्ति और आकांक्षाओं के तंग दायरे तय किए जा रहे हैं.

काफी छोटी उम्र से ही हमारे बच्चों का सीमित और तंग नजरिये से सामना हो रहा है, जिसमें उन्हें बताया जा रहा है कि लड़का होने का क्या मतलब है और लड़की होने का क्या मतलब है.

Published: 
Become a Member to unlock
  • Access to all paywalled content on site
  • Ad-free experience across The Quint
  • Listen to paywalled content
  • Early previews of our Special Projects
×
×