क्या आपने कभी बिना सोचे-समझे ही खूब सारे स्नैक्स या चॉकलेट खाए हैं? वह भी ऐसे समय जब आपको भूख भी ना लगी हो. आप इस बात को जान रहे हों कि आपको भूख नहीं है और आप बिना कैलोरी के काम चला सकते हैं. इसके बावजूद आप खाए जा रहे हों. क्या ये ऐसा नहीं है कि आप खुद को कंट्रोल ही नहीं कर पा रहे हों? कई बार ऐसा हो सकता है- इसे ही 'इमोशनल ईटिंग' कहते हैं.
इमोशनल ईटिंग को आमतौर पर ‘नकारात्मक भावनाओं को शांत करने के लिए जरूरत से ज्यादा खाने’ के तौर पर परिभाषित किया जाता है. इसलिए हम कह सकते हैं कि यह जरूरी तौर पर एक मैलाडैप्टिव स्ट्रैटजी है, जो नकारात्मक और परेशान करने वाले विचारों और भावनाओं जिसमें गुस्सा, डर, थकान और यहां तक कि उदासी शामिल है, को दबाती है. मैलाडैप्टिव स्ट्रैटजी से आशय एक ऐसी रणनीति से है, जिसमें हम प्रतिकूल स्थिति से बाहर निकलने की अस्थायी कोशिश करते हैं. यह कोशिश समस्या को जड़ से खत्म नहीं करती है.
