हमारे सपने अक्सर उन चीजों से जुड़े होते हैं, जो सबसे अधिक हमारे दिमाग में चलती हैं. वो चाहे ट्रेन का छूटना हो या इम्तिहान के वक्त एडमिट कार्ड का घर पर छूट जाना या परीक्षा में आपका वक्त पर नहीं पहुंच पाना.
लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि मासूम बच्चे जो आज के वक्त टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से चारों तरफ से घिरे हुए हैं. उन्हें कैसे सपने आते होंगे?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स का इस्तेमाल डरावने सपनों की वजह कैसे बनता है और बच्चों को उन्हें दिखने वाले डरावने सपनों से कैसे निजात दिला सकते हैं?
ये जानने के लिए फिट हिंदी ने मैक्स हॉस्पिटल में मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और बिहेवियरल साइंस के डॉ समीर मल्होत्रा से बात की.
Read Latest News and Breaking News at The Quint, browse for more from hindi and fit
Published:

