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डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के पार, वैश्विक अनिश्चितता के बीच रिकॉर्ड गिरावट

शुरुआती कारोबार में रुपया 31 पैसे गिरकर 91.28 पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह 90.97 पर बंद हुआ था.

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भारतीय रुपया 21 जनवरी 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.28 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में रुपया 31 पैसे गिरकर 91.28 पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह 90.97 पर बंद हुआ था. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता ने मुद्रा बाजार में दबाव बढ़ाया. घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई.

Deccan Herald के अनुसार, रुपया इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 91.05 पर खुला और 91.28 तक गिर गया. विशेषज्ञों ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड विवाद को लेकर व्यापार युद्ध की बयानबाजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में उछाल ने जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति को बढ़ाया है. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 2,938.33 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के ग्रीनलैंड विवाद और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है. भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल के सत्रों में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया, लेकिन आज ऐसी किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई. "रुपया वैश्विक अनिश्चितताओं और पूंजी बहिर्वाह के कारण दबाव में है," एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा.

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, जनवरी 2026 में रुपया 1% से अधिक गिर चुका है और वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 6.5% की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन गई है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी में लगभग 2.7 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं. "लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं और ग्रीनलैंड विवाद के कारण जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे रुपये पर दबाव बना है," डीबीएस बैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक समीयर करयात ने कहा.

“रुपये में हालिया गिरावट के पीछे विदेशी पूंजी का बहिर्वाह और भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं. आरबीआई का हस्तक्षेप अस्थिरता को सीमित कर सकता है, लेकिन यदि तनाव बढ़ा तो रुपया 92 के स्तर तक जा सकता है.”

इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यूरोपीय और नाटो सहयोगियों पर 1 फरवरी से 10% टैरिफ लगाने की घोषणा ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है. एशियाई बाजारों में गिरावट और अमेरिकी शेयर बाजार में भारी नुकसान के चलते निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख किया. डॉलर इंडेक्स 98.55 पर मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट देखी गई.

मध्य सत्र में जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लिखित, फिच रेटिंग्स ने कहा कि भारतीय कंपनियों की आय में वित्त वर्ष 2027 में सुधार की संभावना है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ और रुपये की कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है. फिच के अनुसार, पूंजी बहिर्वाह और व्यापार घाटा रुपये को कमजोर कर रहे हैं. आरबीआई के हस्तक्षेप के बावजूद, मंगलवार को रुपया 91 के पार चला गया.

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Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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