मणिपुर में लगभग एक वर्ष तक राष्ट्रपति शासन लागू रहने के बाद, भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिलकर सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया. इस दौरान एनडीए के प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न समुदायों के विधायक शामिल थे. राज्य में 2023 से जारी जातीय हिंसा के कारण 250 से अधिक लोगों की मृत्यु और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे. विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन भंग नहीं किया गया.
युमनाम खेमचंद आज शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी करके प्रदेश से राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की है. युमनाम खेमचंद सिंह को मंगलवार को मणिपुर बीजेपी के विधायक दल का नेता चुना गया था.
Deccan Herald के अनुसार, एनडीए के प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात कर लोकप्रिय सरकार के गठन का दावा किया. इस प्रतिनिधिमंडल में चुराचांदपुर और फेर्ज़ॉल जिलों के कूकी-जो बहुल क्षेत्र के विधायक भी शामिल थे, जिससे विभिन्न समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हुई.
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्यपाल को सरकार गठन का दावा सौंपते हुए कहा, "नई मंत्रिपरिषद के गठन के साथ शांति और विकास हमारे मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे." सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में राज्य के विकास और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राथमिकता देने की बात कही.
Hindustan Times ने बताया, बीजेपी के पास 60 सदस्यीय विधानसभा में 37 विधायक हैं, जिनमें 10 कूकी-जो समुदाय से हैं. नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है—एक कूकी-जो समुदाय से और दूसरा नागा पीपुल्स फ्रंट से.
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, बीजेपी विधायक दल की बैठक में सिंह को सर्वसम्मति से नेता चुना गया. कूकी-जो विधायक नेमचा किपगेन को पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने की संभावना है. नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक को भी उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है. सिंह को आरएसएस का समर्थन भी प्राप्त है.
इस रिपोर्ट में जिक्र है, सिंह मणिपुर के प्रमुख राजनेता हैं और मेइती समुदाय से आते हैं. उन्होंने 2017 में विधानसभा अध्यक्ष और 2022 में शिक्षा व ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्य किया. उन्होंने दिसंबर 2025 में कूकी-जो बहुल गांवों का दौरा कर संवाद की पहल की थी. उनके नेतृत्व में सरकार बनने से राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली की उम्मीद जगी है.
जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लिखित, मई 2023 में मेइती और कूकी-जो समुदायों के बीच हिंसा के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. यह मणिपुर में 11वीं बार राष्ट्रपति शासन था. केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने में कई बैठकें कर लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने के प्रयास किए.
इस लेख में जोड़ा गया, कांग्रेस अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विधानसभा भंग करने की मांग की है. उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत छह महीने से अधिक समय तक विधानसभा की बैठक न होने पर उसे भंग किया जाना चाहिए. अदालत ने मामले को डिवीजन बेंच के पास भेज दिया है.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.
