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गाजा 'बोर्ड ऑफ पीस' पर ट्रंप ने किए हस्ताक्षर, बोले-'हमास को हथियार छोड़ना होगा'

ट्रंप ने दावोस में आयोजित समारोह में कहा कि गाजा को "डिमिलिट्राइज्ड और खूबसूरती से पुनर्निर्मित" किया जाएगा.

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22 जनवरी 2026 को दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' की औपचारिक स्थापना के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा क्षेत्र का पुनर्निर्माण, स्थायी संघर्षविराम सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है. कई देशों को सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया, जिनमें से कुछ ने स्वीकृति दी, जबकि अन्य ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है.

The Hindu के अनुसार, ट्रंप ने दावोस में आयोजित समारोह में कहा कि गाजा को "डिमिलिट्राइज्ड और खूबसूरती से पुनर्निर्मित" किया जाएगा.

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि ऐतिहासिक ‘बोर्ड ऑफ पीस’ मिशन में 59 देश शामिल हैं, जिसका उद्देश्य गाजा में जारी संघर्ष को समाप्त करना और हमास को अपने हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करना है.

ट्रंप ने कहा, “उन्हें अपने हथियार छोड़ने होंगे. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह उनके अंत की शुरुआत होगी.”

Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की घोषणा की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन और स्थायी संघर्षविराम के लिए रचनात्मक भूमिका निभाएगा. "पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस ढांचे के तहत फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के ठोस कदम उठाए जाएंगे," मंत्रालय ने कहा.

The Hindu ने बताया, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निर्णय अपने रणनीतिक साझेदारों से विचार-विमर्श के बाद ही लेगा. पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा पट्टी में मानवीय समस्याओं का समाधान और पुनर्निर्माण है. उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया का दीर्घकालिक समाधान पर सकारात्मक प्रभाव होना चाहिए, जिसमें फिलिस्तीनियों की बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए."

The Indian Express के एक लेख में उल्लेख है, पुतिन ने घोषणा की कि रूस अमेरिका में जमे हुए अपने एक अरब डॉलर के संपत्ति बोर्ड ऑफ पीस को दान करेगा, भले ही रूस ने अभी तक औपचारिक रूप से बोर्ड में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया है. उन्होंने कहा, "हमारे विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए, हम गाजा के पुनर्निर्माण के लिए यह राशि देने को तैयार हैं."

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, भारत की संभावित भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. भारत सरकार ट्रंप के निमंत्रण की समीक्षा कर रही है, लेकिन बोर्ड के व्यापक और अस्पष्ट अधिकार क्षेत्र को लेकर नई दिल्ली में चिंता जताई गई है. भारत ने हमेशा गाजा में स्थायी शांति और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है, लेकिन बोर्ड के औपचारिक ढांचे को लेकर अंतिम निर्णय लंबित है.

इस लेख में जोड़ा गया, भारत और इज़राइल के राजनयिक संभावित उच्चस्तरीय दौरों पर चर्चा कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार क्षेत्रीय भागीदारों से परामर्श कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को बोर्ड की वैधता, स्पष्ट अधिकार क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूपता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए.

बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने वाले देशों में सऊदी अरब, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, कतर, यूएई, इज़राइल, पाकिस्तान, अर्जेंटीना, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मोरक्को और कनाडा शामिल हैं जैसा कि इस रिपोर्ट में जिक्र है. वहीं, यूक्रेन और यूनाइटेड किंगडम ने रूस की भागीदारी पर आपत्ति जताई है.

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Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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