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गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निगम चुनाव जीता

गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निगम चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीता.

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महाराष्ट्र के जालना नगर निगम चुनाव में 16 जनवरी 2026 को गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पांगारकर ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की. उन्होंने वार्ड नंबर 13 से चुनाव लड़ा और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रावसाहेब ढोबले को हराया. पंगारकर को कुल 2,661 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,477 वोट प्राप्त हुए. इस चुनाव में शिवसेना को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे.

Hindustan Times के अनुसार, श्रीकांत पंगारकर ने चुनाव जीतने के बाद अपने समर्थकों के साथ जश्न मनाया और कहा कि गौरी लंकेश हत्याकांड का मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है तथा उनके खिलाफ कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव और मुकदमे का आपस में कोई संबंध नहीं है.

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, पंगारकर को 2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. अगस्त 2018 में महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड ने उन्हें विस्फोटक अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था. इससे पहले वे 2001 से 2006 तक जालना नगर परिषद के सदस्य रह चुके हैं.

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, पंगारकर ने 2024 में शिवसेना जॉइन की थी, लेकिन पार्टी में शामिल किए जाने पर विवाद के बाद उनकी सदस्यता को रोक दिया गया. इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. उन्होंने कहा, "मैं 100 प्रतिशत निर्दोष हूं... चुनाव और वह मामला (गौरी लंकेश हत्या) अलग-अलग है."

जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने अधिकांश स्थानों पर बढ़त बनाई, जबकि जालना में निर्दलीय पंगारकर की जीत ने सबका ध्यान आकर्षित किया. कांग्रेस ने लातूर नगर निगम में बहुमत हासिल किया, वहीं बीजेपी ने मुंबई, पुणे, नासिक सहित कई नगर निगमों में बढ़त बनाई.

इस रिपोर्ट में जिक्र है, गौरी लंकेश की हत्या 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर की गई थी, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया था. पंगारकर की गिरफ्तारी के बाद से ही यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है.

इस लेख में उल्लेख है, पांगारकर ने पहले भी 10 वर्षों तक पार्षद के रूप में कार्य किया है और 2011 में शिवसेना से टिकट न मिलने के बाद हिंदू जनजागृति समिति से जुड़े थे. उनकी जीत को स्थानीय राजनीति में उनके पुराने कार्यों और जनसंपर्क का परिणाम माना जा रहा है.

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Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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