ADVERTISEMENTREMOVE AD

जब सीधे तरीके से देश ना बदले, तब विद्रोह जरूरी है

जब हर आेर फैल गई हो निराशा देश में, तो...

Updated
story-hero-img
i
Aa
Aa
Small
Aa
Medium
Aa
Large
BOL LOVE YOUR BHASHA
ADVERTISEMENTREMOVE AD

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दिये का टिमटिमाना जरूरी है,
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है|

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का ,
तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है.

जब हर आेर फैल गई हो निराशा देश में,
तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है.

जब नारी खुद को असहाय पाए तो,
उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है.

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश ,
तो फिर सुभाष का आना जरूरी है.

जब सीधे तरीके से देश ना बदले,
तब विद्रोह जरूरी है...

- प्रयांशी मेहता

(This article was sent to The Quint by Priyanshi Mehta for our Independence Day campaign, BOL – Love your Bhasha.

Would you like to contribute to our Independence Day campaign to celebrate the mother tongue?

Here's your chance! This Independence Day, khul ke bol with BOL – Love your Bhasha. Sing, write, perform, spew poetry – whatever you like – in your mother tongue. Send us your BOL at bol@thequint.com or WhatsApp it to 9910181818.)

Published: 
Speaking truth to power requires allies like you.
Become a Member
Monthly
6-Monthly
Annual
Check Member Benefits
×
×