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अमृतसर में भारतीय सेना के खिलाफ विरोध का यह वीडियो पुराना और भ्रामक है

ये वीडियो अप्रैल का है, जिससे साफ होता है कि ये ऑपरेशन सिंदूर से पहले की घटना है.

फैजान अहमद
वेबकूफ
Published:
<div class="paragraphs"><p>अमृतसर में भारतीय सेना के खिलाफ विरोध का यह वीडियो पुराना और भ्रामक है</p></div>
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अमृतसर में भारतीय सेना के खिलाफ विरोध का यह वीडियो पुराना और भ्रामक है

(Altered By The Quint)

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अमृतसर में भारतीय सेना और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते और विरोध करती भीड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जा रहा है.

  • वीडियो में, कुछ लोगों को पगड़ी पहने और 'मुर्दाबाद' बोलते हुए देखा जा सकता है.

  • इस वीडियो को भारत-पाकिस्तान तनाव से जोड़ा जा रहा है.

इस पोस्ट का अर्काइव यहां देखें

(सोर्स - X/स्क्रीनशॉट)

(इसी तरह के दावों के दूसरे आर्काइव्स को यहां और यहां देखा जा सकता है.)

क्या ये दावा सच है?: नहीं, ये दावा झूठा है.

  • ये वीडियो अप्रैल का है, जिसमें पंजाब के अखाड़ा गांव में बायोगैस प्लांट के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं.

  • भीड़ पंजाब प्रशासन और मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ नारेबाजी कर रही थी. ये वीडियो भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष से संबंधित नहीं है.

हमें क्या पता चला?: हमने वायरल वीडियो को कई स्क्रीनशॉट्स में बांटा और उनमें से कुछ पर गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया.

  • हमें इंस्टाग्राम का एक पोस्ट मिला, जिसमें officialharjinder_sidhu नाम के एक पत्रकार (उनके बायो के मुताबिक) ने कुछ तस्वीरें शेयर की थीं.

  • इसमें वायरल वीडियो जैसी ही तस्वीरें शामिल थीं और इसे 26 अप्रैल को अपलोड किया गया था. इससे साफ होता है कि ये वीडियो ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले का है, जो कि मई में शुरू हुआ था.

पोस्ट के कैप्शन के मुताबिक, लुधियाना जिले के जगरांव के पास अखाड़ा गांव में पुलिस ने कार्रवाई की. जहरीले बायोगैस प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण लोगों पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे विरोध प्रदर्शन का शेड ढह गया.

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  • विरोध प्रदर्शन पर अधिक जानकारी के लिए हमने कीवर्ड सर्च किया, जिससे हमें इस घटना से संबंधित अप्रैल की खबरें मिलीं.

  • द टाइम्स ऑफ इंडिया की 26 अप्रैल की खबर के मुताबिक, अखाड़ा गांव के लोग पिछले एक साल से स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर बायोगैस प्लांट के निर्माण का विरोध कर रहे थे.

  • पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए 'हल्का लाठीचार्ज' किया. उन्होंने कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया और प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए टेंट और शेड उखाड़ दिए, जिससे लोगों में गुस्सा भड़क गया.

  • इसी तरह, द ट्रिब्यून और हिंदुस्तान टाइम्स ने भी अप्रैल के आखिर में इस घटना पर रिपोर्ट की थी.

निष्कर्ष: इससे साफ होता है कि एक पुराना वीडियो मौजूदा भारत-पाकिस्तान तनाव से जोड़कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है.

(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर  9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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