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"मेरे मुंह में सरस्वती बैठी हुई थी और इसलिए मेरे मुंह से उस वक्त मेरा नाम मोहम्मद दीपक निकल गया. मैंने सोचा कि ये लोग समझ जाएंगे कि मैं हिंदू ही हूं, और जो माहौल गरम हो रहा है वो शांत हो जाएगा. लेकिन अब उलटा मुझपर ही एफआईआर हो गया है."
ये शब्द उत्तराखंड के कोटद्वार के दीपक कुमार उर्फ अक्की का है. दीपक का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें हिंदूवादी संगठन बजरंग दल के लोग एक मुस्लिम दुकानदार को दुकान का नाम बदलने के लिए धमका रहे थे. इसी दौरान दीपक ने धमकी देने वालों को डांटकर भगाना शुरू किया. तब ही भीड़ से किसी ने दीपक का नाम पूछा, जिसके जवाब में दीपक ने कहा- मेरा नाम मोहम्मद दीपक है. दीपक ने भीड़ से ये भी कहा कि 30 साल पुरानी दुकान है, इस दुकान का नाम नहीं बदला जाएगा. लेकिन देखते देखते इस मामले ने तूल पकड़ लिया.
इस घटना के बाद बजरंग दल के लोगों ने कोटद्वार में सड़क जाम किया और दीपक के खिलाफ नारेबाजी की. अब पुलिस ने इस मामले में तीन एफआईआर दर्ज की है.
क्विंट से बात करते हुए दीपक कहते हैं, "हमें नहीं पता था कि ये बात इतनी बढ़ेगी. मैंने नफरत फैलाने वालों के खिलाफ आवाज उठाई. 30 साल से बाबा नाम से दुकान चल रही है, किसी को आपत्ति नहीं थी, लेकिन बजरंग दल वालों को इससे दिक्कत हो गई. बजरंग दल के लोग देहरादून से कोटद्वार आकर गालीगलौज और माहौल खराब करने लगे. 4-5 घंटे तक वो लोग हंगामा करते रहे, पुलिस को पता था लेकिन उन्हें रोका नहीं गया. उस टाइम पर पुलिस प्रशासन उनको भगाने में बिल्कुल नाकाम रही."
कोटद्वार पुलिस की प्रेस रिलीज के मुताबिक इस पूरे मामले में कुल 3 एफआईआर दर्ज हुई है. कमल पाल नाम के शख्स की शिकायत के आधार पर दीपक उर्फ अक्की, विजय रावत और उनके अन्य साथियों के खिलाफ गाली-गलौज करते हुए जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग करने तथा जान से मारने की नीयत से हमला करने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई. शिकायत के आधार पर आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 191(1), 351(2) एवं 352 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया.
इसके अलावा पुलिस ने हंगामा करने वाले 'अज्ञात' लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने अपने प्रेस रिलीज में लिखा है-
"31.01.2026 को सूचना प्राप्त हुई कि कोटद्वार में पूर्व में बाबा ड्रेस की दुकान पर हुए आपसी विवाद के संबंध में कुछ व्यक्ति दीपक कुमार के विरोध में उसके जिम एवं पटेल मार्ग स्थित बाबा ड्रेस की दुकान पर प्रदर्शन करने आ रहे हैं. उक्त व्यक्तियों द्वारा नारेबाजी करते हुए सड़क जाम किया गया तथा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग कर सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास किया गया. पुलिस द्वारा रोके जाने पर उन्होंने पुलिस बैरियर हटाकर उग्र नारेबाजी एवं गाली-गलौच करते हुए सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न किया, साथ ही लगभग 30–40 अज्ञात व्यक्तियों द्वारा पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की कर सरकारी कार्य में बाधा डाली गई.
हालांकि दीपक और उनके साथियों का कहना है कि कोटद्वार में जिन लोगों ने हंगामा किया वो सब वायरल वीडियो में दिख रहे हैं, फिर भी पुलिस ने एफआईआर में नाम नहीं लिखा.
इस मामले में पुलिस ने दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर भी बदरंग दल के गौरव कश्यप और शक्ति सिंह गुंसाई और अन्य लोगों के खिलाफ धारा 115(2), 333, 351(2), 352 भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज की है.
कोटद्वार के पटेल मार्ग पर बाबा ड्रेस नाम से दुकान चला रहे वकील अहमद को कुछ वक्त पहले बजरंग दल से जुड़े लोगों ने दुकान का नाम बाबा ड्रेसेज से बदलकर कुछ और रखने की धमकी दी थी. तब दुकान वालों ने इस बात को ये कहकर नजरअंदाज कर दिया कि दुकान जब शिफ्ट हो जाएगी तो देखा जाएगा. लेकिन जब वकील अहमद ने अपनी दुकान लगभग 30-40 मीटर दूर एक नई जगह शिफ्ट की तो बजरंग दल से जुड़े लोग फिर नाम बदलने को लेकर धमकाने आ गए.
इसी दौरान हल्क जिम के मालिक दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत पास में बैठे थे.
द क्विंट से बात करते हुए विजय रावत बताते हैं कि शोर की आवाज सुनकर हमलोग भी आ गए. हम लोगों ने नफरत फैलाने वालों से कहा कि 30 साल से वकील अहमद बाबा ड्रेस नाम से दुकान चला रहे हैं, तुम लोग कौन होते हो नाम बदलवाने वाले और धमकी देने वाले. जिसके बाद बहस हुई.
विजय कहते हैं, "बजरंग दल के लोग कोटद्वार का माहौल खराब करना चाहते हैं, हम लोग ऐसा होने नहीं देंगे. आप खुद बताइए कौन अपनी दुकान का क्या नाम रखेगा ये क्या बजरंग दल वाले फैसला करेंगे? बजरंग दल वाले इस घटना के बाद 31 जनवरी को दीपक पर हमला करने आए थे, पुलिस ने उन्हें उस वक्त क्यों नहीं गिरफ्तार किया? पुलिस के सामने कुछ उपद्रवी अभद्र नारे लगा रहे थे, मारने की धमकी दे रहे थे. लेकिन अब हम लोगों पर एफआईआर हुई है. तो क्या गलत को रोकने पर भी अब एफआईआर होनी चाहिए?"
दीपक ने कहा, हमें डर नहीं है लेकिन परिवार को डर है. उन्हें हमारी चिंता है. हालांकि मेरी मां को मुझपर गर्व भी है.