Home Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Hindi Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Politics Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019बिहार राज्यसभा चुनाव: क्या तेजस्वी और नीतीश कुमार के बेटे निशांत पहुंचेंगे संसद?

बिहार राज्यसभा चुनाव: क्या तेजस्वी और नीतीश कुमार के बेटे निशांत पहुंचेंगे संसद?

राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने बिहार से नितिन और शिवेश राम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है.

मोहन कुमार
राजनीति
Published:
<div class="paragraphs"><p>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव.</p></div>
i

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव.

(फोटो: ऑल्टर्ड बाय द क्विंट)

advertisement

होली के जश्न के बीच बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. राजनीतिक गलियारों में उम्मीदवारों के नामों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. सत्तारूढ़ एनडीए की तरफ से बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, जेडीयू ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. लेकिन सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नाम की चर्चा जोरों पर है.

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होने हैं. एनडीए के तीन और आरजेडी के दो सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने पर ये चुनाव हो रहे हैं. NDA ने पांच उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है. वहीं आरजेडी ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर मुकाबला रोचक कर दिया है.

महागठबंधन की तरफ से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के चुनाव लड़ने की खबर है. हालांकि, इसको लेकर अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.

बिहार से जिन 5 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, उनमें उपसभापति हरिवंश (जेडीयू), केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (जेडीयू), उपेंद्र कुशवाहा (आरएमएल), प्रेमचंद्र गुप्ता (आरजेडी) और अमरेंद्र धारी सिंह (आरजेडी) हैं.

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है, जबकि 16 मार्च को वोटिंग होगी.

नितिन नवीन और शिवेश कुमार के नाम का ऐलान

पांच बार के विधायक नितिन नवीन इस समय बिहार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. उन्हें जनवरी में पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था. पार्टी की कमान मिलने के बाद से यह लगभग तय माना जा रहा था कि वे राज्यसभा जाएंगे. नवीन के साथ पार्टी ने प्रदेश महामंत्री शिवेश कुमार को दूसरा उम्मीदवार घोषित किया है.

इन नामों के ऐलान के साथ बीजेपी ने जातिगत समीकरणों का भी खास ध्यान रखा है. नवीन जहां कायस्थ समाज से आते हैं, वहीं शिवेश कुमार रविदास समुदाय से संबंध रखते हैं. इसके जरिए पार्टी ने सवर्ण और महादलित, दोनों वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है.

उम्मीदवारी पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवेश कुमार ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, "मैं पार्टी की टॉप लीडरशिप को धन्यवाद देता हूं. बिहार के इतिहास में आजादी के बाद पहली बार रविदास समुदाय का कोई व्यक्ति राज्यसभा जा रहा है."

शिवेश कुमार को राजनीति विरासत में मिली थी. उनके पिता मुन्नीलाल बीजेपी के सांसद और केंद्रीय मंत्री थे. 2010 में शिवेश कुमार ने भोजपुर जिले की एकमात्र सुरक्षित सीट अगीआंव से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

जेडीयू से क्या निशांत कुमार जाएंगे राज्यसभा?

हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर को जेडीयू फिर राज्यसभा भेजेगी या नहीं, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है. पार्टी ने अब तक अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है. हालांकि, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी इस बार हरिवंश का टिकट काट सकती है. उनकी जगह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पार्टी राज्यसभा भेज सकती है. इस चर्चा को तब और बल मिला जब बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने निशांत की सक्रिय राजनीति जल्द एंट्री की बात कही. बता दें कि निशांत की राजनीति में एंट्री की चर्चा पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के वक्त से ही चल रही है.

द क्विंट से बातचीत में जेडीयू के एक सीनियर नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि निशांत कुमार को जेडीयू की ओर से राज्यसभा भेजा जा सकता है. उनका पूरा चांस है.

दूसरी तरफ माना जा रहा है कि कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर की सीट बरकरार रह सकती है. ठाकुर वर्तमान में केंद्र में मंत्री हैं और अति पिछड़ी जाति से होने के कारण जातीय समीकरण में फिट बैठते हैं. गौरतलब है कि जेडीयू कोटे से मंत्री बनाए गए रामनाथ ठाकुर 2014 से लगातार राज्यसभा सदस्य हैं और नीतीश कुमार के विश्वस्त सहयोगियों में एक माने जाते हैं.

NDA के 5वें उम्मीदवार होंगे कुशवाहा

एनडीए ने अपने पांचवें उम्मीदवार के रूप में आरएमएल प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को समर्थन दिया है. इस रेस में भोजपुरी स्टार पवन सिंह भी माने जा रहे थे. हालांकि, कहा जा रहा है कि विवादों की वजह से गठबंधन ने कुशवाहा को तरजीह दी है. साथ ही वे जातिगत समीकरण में भी फिट बैठते हैं. बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उपेंद्र कुशवाहा बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे. वे एनडीए समर्थित उम्मीदवार थे.

अपनी उम्मीदवारी का ऐलान करते हुए कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट में पीएम मोदी, अमित शाह, नीतीश कुमार सहित एनडीए नेताओं का आभार जताया है.

इससे पहले उनकी उम्मीदवारी को लेकर द क्विंट से बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने कहा था कि "वे एनडीए के वरिष्ठ नेता हैं. उनके लिए किसी भी तरह की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है."

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

तेजस्वी के नाम पर सस्पेंस 

रविवार, 1 मार्च को आरजेडी पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें तेजस्वी और लालू यादव को उम्मीदवार चयन के लिए अधिकृत किया गया है. इस बीच महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी को राज्यसभा भेजने की भी चर्चा है. आरजेडी प्रवक्ता ने इन कयासों को न तो खारिज किया और न ही इसकी पुष्टि की.

द क्विंट से बातचीत में पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा, "तेजस्वी जी नेता हैं, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं. मीडिया में जो चर्चाएं चल रही है मैं उसे न खारिज कर सकता है हूं और न ही स्वीकार कर सकता हूं." इसके साथ ही उन्होंने कहा कि "अगर वे उम्मीदवार बनते हैं तो ये पार्टी के लिए अच्छा होगा. लेकिन फैसला तो उन्हें खुद ही लेना है."

नंबर का खेल, 5वीं सीट का फंसा पेंच

उम्मीदवारों के नामों के बीच, वोटों की गणित ने 5वीं सीट का मुकाबला दिलचस्प बना दिया है. 243 सदस्यीय विधानसभा में हर उम्मीदवार को जीत के लिए 41 वोट चाहिए. एनडीए 202 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में है. मौजूदा संख्या बल के आधार पर गठबंधन चार सीटें आसानी से जीत सकती है. हालांकि, पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम तीन क्रॉस वोट की जरूरत पड़ेगी.

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, "बिहार के विकास के लिए वोट देना है. ऐसे कई लोग हैं जो अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर बिहार के विकास के लिए खड़े होंगे. हम कैंडिडेट दे रहे हैं. वोटिंग के दिन पता चलेगा कि कौन बिहार के विकास के साथ है और कौन विनाश के साथ."

दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, लेफ्ट और IIP) के पास सिर्फ 35 वोट है. इसमें से आरजेडी के 25 वोट हैं. अगर आरजेडी को एक सीट जीतनी है तो उसे AIMIM (5) और बीएसपी (1) के समर्थन की जरूरत पड़ेगी.

बता दें विधानसभा चुनाव में AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की पेशकश की थी, लेकिन तेजस्वी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था. चुनाव में AIMIM ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

राज्यसभा चुनाव के ऐलान के बाद AIMIM ने खुद का उम्मीदवार उतारने की बात कही थी. तब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा था,

"राज्यसभा में हमारा कोई नहीं है. राज्यसभा में कई दलों का प्रतिनिधित्व है, लेकिन AIMIM का कोई सदस्य नहीं है. ऐसे में पार्टी अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है."

ऐसे में क्या महागठबंधन को AIMIM का साथ मिलेगा या नहीं, ये एक बड़ा सवाल है. दूसरी तरफ बीएसपी का पिछला रिकॉर्ड सत्तारूढ़ पक्ष को समर्थन देने का रहा है.

अंक गणित की अनिश्चितता से तेजस्वी के खुद चुनाव लड़ने पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं. जानकारों की मानें तो अगर तेजस्वी चुनाव में खड़े होते हैं और हार जाते हैं तो इससे पार्टी की किरकिरी हो सकती है.

हालांकि, आरजेडी प्रवक्ता ने संख्या बल की कमी से इनकार किया है. शक्ति सिंह ने कहा, "हमारे पास संख्या बल की कोई कमी नहीं है."

Published: undefined

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT