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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम कट गए. SIR के बाद प्रदेश की कुल 294 विधानसभा सीटों पर 6.77 करोड़ मतदाता हैं. चुनाव के दौरान कम हुए मतदाताओं की संख्या का वीआईपी और हॉट सीटों पर क्या असर पड़ा है, इसका विश्लेषण करने के लिए साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान हर विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या से तुलना की गई है.
जैसे- ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर SIR के बाद घटे मतदाताओं की संख्या पता करना है तो, भवानीपुर सीट पर 2024 में कुल मतदाता- SIR के बाद भवानीपुर सीट पर कुल मतदाता के जरिए डिलीट मतदाताओं की संख्या और प्रतिशत निकाला गया है. आगे कुछ खास सीटों का विश्लेषण करते हैं.
1. भवानीपुर- 25% मतदाता कम हुए
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भवानीपुर सीट पर 205487 मतदाता थे. SIR के बाद 155308 मतदाता हो गए. यानी 50179 (24.42%) मतदाता कम हो गए.
भवानीपुर सीट 2011 से टीएमसी का गढ़ रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस सीट से कई बार जीत दर्ज की है. हालांकि, 25% मतदाताओं के नाम कटने और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के मैदान में उतरने से यहां का मुकाबला दिलचस्प हो गया है. ममता बनर्जी को पिछले चुनाव में नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.
2. नंदीग्राम- 3.24% मतदाता कम हुए
साल 2024 में नंदीग्राम सीट पर कुल 273790 मतदाता थे. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद यहां 264917 मतदाता बचे. 8873 यानी करीब 3.24% मतदाता 2024 की तुलना में कम हो गए.
नंदीग्राम 2007 के जमीन आंदोलन का केंद्र रहा है और अब शुभेंदु अधिकारी बनाम ममता बनर्जी की प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक बन गया है. 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने यहां मामूली अंतर से जीत हासिल की थी. भवानीपुर के अलावा, शुभेंदु एक बार फिर इस सीट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. उनके सामने टीएमसी ने पवित्र कर को मैदान में उतारा है.
3. खड़गपुर सदर- 24.99% मतदाता कम हुए
यहां लोकसभा चुनाव 2024 में 239468 मतदाता थे, लेकिन SIR में 59844 (24.99%) मतदाता कम होकर 179624 हो गए.
खड़गपुर सदर सीट 2011 तक कांग्रेस का गढ़ रही है, लेकिन अब यहां बीजेपी और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है.
इस बार दिलीप घोष और प्रदीप सरकार आमने-सामने हैं, जिससे मुकाबला हाई-प्रोफाइल बन गया है. हालांकि, करीब 25 फीसदी मतदाता डिलीशन के बाद यह मुकाबला दोनों पार्टियों के लिए टफ फाइट माना जा रहा है. 2021 में बीजेपी ने टीएमसी को मात्र 3,771 वोटों से हराया था.
4. बहरामपुर- 10.11% मतदाता कम हुए
बहरामपुर सीट से लोकसभा चुनाव 2024 की तुलना में SIR के बाद 10.11% मतदाता कम हो गए.
बहरामपुर सीट भी कांग्रेस का गढ़ रही है. पिछले चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की वजह से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन इस बार पार्टी ने अपने सबसे अनुभवी नेता अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारा है. पर सवाल है कि 10 फीसदी मतदाताओं के नाम कटने से किस पार्टी को ज्यादा नुकसान होगा?
5. बालीगंज- 27.08% मतदाता कम हुए
दक्षिण कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से अहम सीटों में से एक बालीगंज में 2006 से टीएमसी का दबदबा रहा है. लेकिन सुब्रत मुखर्जी के निधन और बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के बाद से एक वैक्यूम क्रिएट हुआ.
टीएमसी ने इस बार शोवनदेब चट्टोपाध्याय पर दांव लगाया है, जबकि बीजेपी की ओर से शतरूपा मैदान में हैं.
6. बरुईपुर पश्चिम- 15.68% मतदाता कम हुए
दक्षिण 24 परगना जिले की इस सीट का प्रतिनिधित्व विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी करते हैं.
बरुईपुर पश्चिम को TMC का किला कहते हैं, लेकिन पिछले तीन चुनावों को देखें तो बीजेपी का जनाधार बढ़ा है. वहीं CPI(M) का वोट शेयर गिरा है. टीएमसी ने एक बार फिर बिमान बनर्जी पर भरोसा जताया है, जबकि बीजेपी ने बिस्वजीत पॉल पर दांव लगाया है. यहां पर करीब 15.68 फीसदी वोटर्स घटे हैं.
7. कोलकाता पोर्ट- 30.55% मतदाता कम हुए
राजधानी कोलकात के इस सीट से टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मंत्री फिरहाद हाकिम लगातार तीन बार विधायक हैं. यहां अल्पसंख्यक मतदाताओं का बड़ा आधार है.
SIR प्रक्रिया के बाद यहां 30.55 फीसदी वोटर्स कम हुए हैं. ऐसे में टीएमसी के सामने अपना किला बचाने की चुनौती होगी. फिरहाद हाकिम के सामने बीजेपी के राकेश सिंह. उन्हें पांच महीने तक जेल में रहना पड़ा था और अब जमानत पर हैं.
8. कालीगंज- 9.02% मतदाता कम हुए
नदिया जिले की कालीगंज सीट से CPI(M) ने सबीना यासमीन को अपना उम्मीदवार बनाया है. पिछले साल उपचुनाव के दौरान हुए बम धमाके में उनकी 9 साल की बेटी की मौत हो गई थी.
सबीना राजनीतिक हिंसा के खिलाफ लेफ्ट फ्रंट के अभियान का एक मजबूत चेहरा बनकर उभरी हैं. टीएमसी ने यहां से मौजूदा विधायक अलीफा अहमद को टिकट दिया है. वहीं बीजेपी ने बापन घोष को मैदान में उतारा है.
9. आसनसोल दक्षिण- 16.47% मतदाता कम हुए
2021 में बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल ने कड़े मुकाबले में टीएमसी की सायोनी घोष को हराकर जीत दर्ज की थी. इस सीट पर 16.47 फीसदी डिलीशन हुआ है.
औद्योगिक क्षेत्र और शहरी वोट बैंक वाली इस सीट पर बीजेपी और टीएमसी में आमने-सामने का मुकाबला है. टीएमसी ने तीन बार के विधायक तपस बनर्जी को एक बार फिर मैदान में उतारा है, जबकि बीजेपी ने अग्निमित्रा पॉल पर भरोसा जताया है.
10. शिबपुर- 19.22% मतदाता कम हुए
बीजेपी ने एक्टर रुद्रनील घोष को शिबपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है. उनके सामने टीएमसी के डॉ राणा चटर्जी मैदान में हैं. इस सीट पर 19 फीसदी मतदाता कम हुए हैं.
आंकड़ों की बात करें तो शिवपुर पिछले डेढ़ दशक से टीएमसी का गढ़ रहा है. 2021 में मनोज तिवारी ने 50% से अधिक वोट हासिल किए थे. हालांकि, बीजेपी के लिए राहत की बात है कि उसका वोट शेयर भी बढ़ा है और पिछली बार पार्टी उम्मीदवार को 30 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे.
पश्चिम बंगाल SIR: सबसे ज्यादा वोटर संख्या में कमी चौरंगी, जोरासांको, समसेरगंज, हावड़ा उत्तर विधानसभा में हुई है.
द क्विंट
1. संदेशखाली- 9.11% मतदाता कम हुए
संदेशखाली सीट पर 2024 की तुलना में SIR के बाद 9.11% मतदाता कम हो गए हैं. यह क्षेत्र 2024 में उस वक्त सुर्खियों में आया, जब महिलाओं ने सत्तारूढ़ टीएमसी के नेता शाहजहां शेख पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के आरोप लगाए. उस दौरान हिंसा और भारी विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला.
यह सीट बशीरहाट लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने यहां जीत दर्ज की, लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी को बढ़त मिली थी, जिससे महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सियासी लड़ाई उभरकर सामने आई. इस बार यहां कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही है. बीजेपी ने सनत सरदार को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि टीएमसी की ओर से झरना सरदार मैदान में हैं.
2. गाइघाटा (SC)- 15.36% मतदाता कम हुए
यह मतुआ बहुल सीटों में से एक है. पिछले चुनाव में बीजेपी ने इस समुदाय के दम पर कई सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन नदिया और उत्तर 24 परगना जिले में बड़े पैमाने पर मतुआ समुदाय के वोटरों के डिलीशन से चुनावों पर इसका असर पड़ सकता है.
3. शमशेरगंज- 35.10% मतदाता कम हुए
मुर्शिदाबाद जिले की यह एक मुस्लिम बहुल सीट है जहां 2025 में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे. यहां TMC, कांग्रेस, बीजेपी और नवगठित 'आम जनता उन्नयन पार्टी' के बीच बहुकोणीय मुकाबला है.
मुर्शिदाबाद और मालदा- बांग्लादेश से सटे हैं और राज्य में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले जिलों में शामिल हैं. ऐसे में इन जिलों के चुनावों पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं.
4. मुर्शिदाबाद- 11.27% मतदाता कम हुए
साल 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में SIR के बाद मुर्शिदाबाद विधानसभा सीट से 11.27% मतदाता कम हुए हैं. यह उन चुनिंदा सीटों में से है, जहां आज भी कांग्रेस की अच्छी-खासी मौजूदगी मानी जाती है.
2011 और 2016 में शाओनी सिंघा रॉय ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2021 में टीएमसी उम्मीदवार के रूप में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी के गौरी शंकर घोष 2,491 वोटों से विजयी हुए थे. इस सीट पर अब तक टीएमसी का खाता नहीं खुला है. ऐसे में इस बार का मुकाबला रोचक माना जा रहा है.
5. डाबग्राम-फुलबाड़ी- 17.83% मतदाता कम हुए
2024 की तुलना में SIR के बाद इस सीट से 17.83% मतदाता कम हुए हैं. BJP की शिखा चटर्जी यहां से विधायक हैं. यह उत्तर बंगाल का एक प्रमुख औद्योगिक-शहरी केंद्र है. टीएमसी ने यहां से रंजन शील शर्मा को टिकट दिया है.