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सुनंदा के दत्ता रे ने टेलीग्राफ में लिखा है कि पूर्वाग्रह को पूर्वाग्रह बढ़ावा देता है. अपने अतीत से युद्धरत बांग्लादेश जब भी खुद को घिरा हुआ महसूस करता है तो कल की लड़ाइयों की ओर मुड़ जाता है. एक बार जियाउर रहमान के बारे में अफवाहें फैलीं कि उन्होंने राष्ट्रगान, ‘आमार सोनार बांग्ला’ की जगह शहनाज रहमतुल्लाह का जोशपूर्ण ‘प्रथम बांग्लादेश’ गाया है. उनके उत्तराधिकारी हुसैन मोहम्मद इरशाद ने इंडोनेशिया की तरह शासन में सेना के एक संवैधानिक भूमिका देने की बात कही. ऐसी अफवाहों ने एक नई बांग्लादेशी पहचान बनाने की बेताबी को दर्शाया जिसने स्वतंत्र गणराज्य को अविभाजित बंगाल से अलग कर दिया.
सुनंदा के दत्ता रे आगे लिखते हैं कि पहचान के ओवरलैप होने के डर को जुल्फिकार अली भुट्टो की 1971 की टिप्पणी से जोड़ना लुभावना है कि अगर भाषा ही एकमात्र मानदंड है तो मुस्लिम बांग्ला को पश्चिम बंगाल में फिर शामिल होना चाहिए. जबकि, अगर धर्म मुद्दा है तो प्रांत का एकमात्र भविष्य पाकिस्तान में है.
भारत को व्यापार, पारगमन, कच्चे माल, सांस्कृतिक समर्थन और सुरक्षा के लिए बांग्लादेश की जरूरत है. क्या भारत मुफ्ती में हजारों पाकिस्तानी सैनिकों के कोलंबो हवाई अड्डे पर आने के दूसरे रूप को पसंद करेगा जिन्होंने याह्या खान द्वारा ऑपरेशन सर्चलाइट का आदेश दिए जाने पर ढाका जाने से पहले वर्दी बदल ली थी?
सुरजीत एस भल्ला ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखा है कि ट्रंप टैरिफ को समझने का दावा करना आसान नहीं है. ट्रंप टैरिफ का अमेरिकी व्यापार घाटे को संतुलित करने से बहुत कम लेना-देना था. उनका राजनीतिक अर्थव्यवस्था से सबकुछ लेना-देना था. दो अप्रैल को ‘मुक्ति दिवस’ (किससे मुक्ति, कोई वैध रूप से पूछ सकता है) आया. चीन को रोकने की अमेरिकी नीति उजागर हुई. सभी के लिए दस प्रतिशत टैरिफ और चीन के लिए 125 प्रतिशत.
सुरजीत एस भल्ला लिखते हैं कि पिछले दो दशकों से जीडीपी के 2 से 2.5 प्रतिशत के स्तर की तुलना में एफडीआई 1 प्रतिशत से भी कम हो गया है. यह स्तर 1990 के दशक के समान है. एफडीआई को किसने मारा? विश्वव्यापी वित्तीय संकट के बाद 2010 में चीन ने मूल्य श्रृंखला को ऊपर ले जाने का फैसला किया. कम मूल्य वाले निर्मित सामानों के निर्माण को अन्य देशों, उदाहरण के लिए बांग्लादेश, भारत, मैक्सिको और वियतनाम पर छोड़ दिया. अन्य देशों ने चुनौती स्वीकार की, हमने नहीं की. समय बदल रहा है और भारत को अपनी आर्थिक आरामदायक नींद से बाहर आने के लिए मजबूर कर रहा है. ट्रंप औद्योगिक और कृषि सुधार की मांग कर रहे हैं. यह बाहरी झटका सरकार को सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए एक सुविधाजनक बहाना प्रदान करता है.
पी चिदंबरम ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखा है कि अमेरिका ने ज्यादातर देशों पर ‘शुल्क’ लगा दिया है. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर कठोर शुल्क लगा कर अमेरिका को फिर से महान बनाया जा सकेगा. द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से अस्सी सालं में दुनिया को श्रम, वस्तुओं और सेवाओं की मुक्त आवाजाही से बहुत लाभ हुआ है और सबसे बड़ा लाभार्थी देश संयुक्त राज्य अमेरिका है. यह दुनिया का सबसे धनी, सबसे शक्तिशाली, सबसे अभिनव देश है. इसमें दुनिया की सबसे अच्छी कंपनियां, सबसे अच्छे विश्वविद्यालय, सबसे अच्छी प्रयोगशालाएं और सबसे अच्छे एथलीट हैं. अमेरिकी ग्रीन कार्ड और अमेरिकी पासपोर्ट सबसे प्रतिष्ठित दस्तावेज हैं.
भारत ने शुल्क युद्ध पर कोई टिप्पणी नहीं की है और उसने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने का विकल्प चुना है. ट्रंप के शुल्क पर रोक लगाने से दुनिया को यह भरोसे की कुछ उम्मीद बनी है कि उन्हें आर्थिक समझदारी आएगी. हालांकि अगर ट्रंप रोक हटाते हैं और दो अप्रैल को घोषित शुल्कों को फिर से लागू करते हैं तो वे दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर देंगे. लेखक का मानना है कि अर्थशास्त्र के नियम ट्रंप साहब को आखिरकार परास्त कर देंगे. जीत के उस क्षण मे भारत हारने वाले के साथ खड़ा नहीं दिख सकता.
शशि थरूर ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखा है कि केरल एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जो उसकी उपलब्धियों को नष्ट कर सकता है. नशीली दवाओं की महामारी ने शहर से लेकर गांव तक घुसपैठ कर ली है. इससे लोगों की जिन्दगियां बिखर गयी हैं, परिवार बिखर गये हैं.
शशि थरूर लिखते हैं कि आगे का रास्ता चार स्तंभों पर टिका होना चाहिए- रोकथाम, प्रवर्तन, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी. व्यापक मादक द्रव्यों के सेवन की शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए. युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर डिजिटल अभियान जरूरी हैं. सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. प्रशिक्षित, पेशेवरों के साथ आधुनिक उपचार सुविधाएं आवश्यक हैं. कॉरपोरेट ऐसी सेवाएं प्रदान करने के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों का समर्थन कर सकते हैं जिससे नशीली दवाओं से संबंधित मौत में कमी आए. एक या दो महीने तक नशे की लत से दूर रहना मददगार हो सकता है. साहसिक समाधानों को अपनाकर और अपने लोगों की भलाई को प्राथमिकता देते हुए निर्णायक कार्रवाई करके केरल एक आदर्श राज्य के रूप में अपनी स्थिति को पुन: प्राप्त कर सकता है.
अनिता कात्याल ने डेक्कन क्रोनिकल में लिखा है कि कांग्रेस ने एआईसीसी अधिवेशन में बीते हफ्ते यह दिखाने का सचेत प्रयास किया है कि वह स्वतंत्र और स्पष्ट चर्चा को प्रोत्साहित करती है. शशि थरूर को राजनीतिक प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए बोलने का अवसर देना इसका प्रमाण है. शशि थरूर अक्सर किसी न किसी कारण से सुर्खियों में रहते हैं. अगले साल केरल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में कांग्रेस अपने चार बार के सासंद को खोने का जोखिम नहीं उठा सकती है जिनके युवाओं में बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं. स्वतंत्र विचार रखने के लिए जाने जाने वाले थरूर ने सत्र में निराश नहीं किया.
फिर, उन्होंने वस्तुत: अतीत में रहन के लिए कांग्रेस को फटकार लगाई. उन्होंने युवा मतदाताओं की ओर पार्टी को देखने की जरूरत बताई. यह पहली बार नहीं है कि थरूर ने अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की बात की है. वास्तव में कांग्रेस नेतृत्व की नाराजगी के बावजूद मोदी सरकार की प्रशंसा की है. फिर भी केरल के सांसद शशि थरूर को मंच देकर पार्टी सही मायने में दावा कर सकती है कि वह पार्टी नेताओं द्वारा अपनी राय खुलकर व्यक्त करने से नहीं डरती है.
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