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"खुशी है कि बेटा देश के काम आया", हिमाचल के सूबेदार मेजर पवन पंचतत्व में विलीन

Operation Sindoor के दौरान शनिवार को पाकिस्तानी गोलाबारी में सूबेदार मेजर पवन कुमार शहीद हो गए थे.

क्विंट हिंदी
न्यूज
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<div class="paragraphs"><p>Operation Sindoor के बाद शनिवार को पाकिस्तानी गोलाबारी में सूबेदार मेजर पवन कुमार शहीद हो गए थे.</p></div>
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Operation Sindoor के बाद शनिवार को पाकिस्तानी गोलाबारी में सूबेदार मेजर पवन कुमार शहीद हो गए थे.

(फोटो: क्विंट हिंदी द्वारा प्राप्त)

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जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पुंछ में पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए सूबेदार मेजर पवन कुमार (Subedar Major Pawan Kumar) का रविवार, 11 मई को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित उनके पैतृक गांव शाहपुर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

सूबेदार मेजर पवन कुमार 31 अगस्त को रिटायर होने वाले थे. उनके पिता गरज सिंह ने कहा, "मेरा बेटा 93 ब्रिगेड में ऑन ड्यूटी था. मुझे गम तो है लेकिन मुझे खुशी भी है. मेरा बेटा देश के काम आया."

सूबेदार मेजर अपने पीछे माता-पिता, पत्नी सुषमा देवी और दो बच्चे- 22 वर्षीय बेटा अभिषेक और 21 वर्षीय बेटी अनामिका को छोड़ गए हैं.

शहीद सूबेदार मेजर पवन कुमार

(फोटो: X)

रिटायर होने वाले थे शहीद पवन कुमार

गरज सिंह बताते हैं कि अगस्त 2025 में सूबेदार मेजर पवन कुमार सेना में 32 साल पूरा करने के बाद रिटायर होने वाले थे.

वे कहते हैं, "कुछ महीने पहले, जब उसे अपनी अंतिम पोस्टिंग चुनने का विकल्प दिया गया था, तो उसने सीमावर्ती शहर में पोस्टिंग का विकल्प चुना. हम सभी उसकी वापसी की योजना बना रहे थे, किसने सोचा था कि वो तिरंगे में लिपटे घर आएगा."

"उसके (सूबेदार मेजर पवन कुमार) रिटायरमेंट के बाद के लिए मैंने 90 फीसदी तैयारी कर रखी थी. अभी तो वो खुद आने वाला था."

गरज सिंह भी सेना में रह चुके हैं. 19 साल देश की सेवा करने के बाद वे हवलदार के पद से रिटायर हुए थे.

रविवार, 11 मई को शहीद सूबेदार मेजर का पार्थिव शरीर उनके पैतृका गांव शाहपुर पहुंचा.

(फोटो: स्क्रीनशॉट)

"हमें कोई खतरा नहीं है"

गरज सिंह आगे कहते हैं, "हमारी रोज बात होती थी. कल या परसों की बात है कि मैंने उससे पूछा था- 'अगर फायर आ जाए तो क्या वहां शेल्टर की व्यवस्था है?' उसने बोला- 'अंडरग्राउंड शेल्टर है. लेकिन हमारी बैरकें ऐसी बनी हुई हैं कि वे टूटती नहीं है. हमें कोई खतरा नहीं है. अंडरग्राउंड शेल्टर में जाने की जरूरत नहीं है.'

सूबेदार मेजर पवन कुमार पुंछ में अग्रिम मोर्चे पर तैनात थे. पाकिस्तान की ओर से फायरिंग में वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली.

रविवार, 11 मई को शहीद सूबेदार मेजर का पार्थिव शरीर उनके पैतृका गांव शाहपुर पहुंचा. हाथों में तिरंगा थामे और हिंदूस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सैकड़ों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए.

शहीद सूबेदार मेजर पवन कुमार को लोगों ने दी श्रद्धांजलि

(फोटो: स्क्रीनशॉट)

सीएम सुक्खू ने दी श्रद्धांजलि

सूबेदार मेजर पवन कुमार को श्रद्धांजलि देते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार, 10 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "देश की सेवा में वीर जवान पवन कुमार जी के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता."

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने X पर एक पोस्ट में कहा, "वीरभूमि हिमाचल के शाहपुर निवासी के वीर सपूत पवन कुमार जरयाल जी पाकिस्तानी शत्रुओं से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए. मैं पवन जरयाल जी कि वीरता को कोटिशः नमन करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं."

इनपुट- अंकुर कपूर

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