Home Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Hindi Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019News Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019संभल हिंसा: तत्कालीन CO अनुज चौधरी पर FIR का आदेश देने वाले CJM का ट्रांसफर

संभल हिंसा: तत्कालीन CO अनुज चौधरी पर FIR का आदेश देने वाले CJM का ट्रांसफर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए 14 न्यायिक अधिकारियों का ट्रांसफर किया है.

क्विंट हिंदी
न्यूज
Published:
<div class="paragraphs"><p>संभल हिंसा: तत्कालीन CO अनुज चौधरी पर FIR का आदेश देने वाले CJM का ट्रांसफर</p></div>
i

संभल हिंसा: तत्कालीन CO अनुज चौधरी पर FIR का आदेश देने वाले CJM का ट्रांसफर

(फोटो- द क्विंट)

advertisement

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए 14 न्यायिक अधिकारियों का ट्रांसफर किया है. इनमें संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर भी शामिल हैं. उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नियुक्त किया गया है.

यह तबादला उस आदेश के कुछ ही दिनों बाद किया गया है, जिसमें सीजेएम सुधीर ने नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा के मामले में पूर्व सर्किल ऑफिसर (CO) अनुज चौधरी समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए थे.

विभांशु सुधीर की जगह आदित्य सिंह को संभल का नया CJM बनाया गया है. गौरतलब है कि आदित्य सिंह ने संभल जामा मस्जिद के सर्वे के आर्डर दिए थे.

कोर्ट ने पुलिसवालों के खिलाफ क्यों दिया था FIR का आदेश?

संभल हिंला में घायल युवक के पिता ने 4 फरवरी 2025 को CJM कोर्ट एक याचिका दायर की थी. इस याचिका पर एक दर्जन से ज्यादा बार सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.

याचिका में आरोप लगाया गया कि 24 नवंबर 2024 को सुबह करीब 8:45 बजे आवेदक का बेटा संभल के मोहल्ला कोट स्थित जामा मस्जिद के पास अपने ठेले पर रस्क और बिस्कुट बेच रहा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि नामजद पुलिस अधिकारियों ने अचानक भीड़ पर जान से मारने की नीयत से अपने हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी.

9 जनवरी को अपने आदेश में जज ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट (जिसमें 'गन शॉट वाउंड' और हड्डी टूटने का जिक्र है) और पीड़ित के बयान से यह स्पष्ट होता है कि एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) घटित हुआ है.

इसको साथ ही अपने 11 पन्नों के आदेश में सीजेएम सुधीर ने साफ कहा कि पुलिस अपराध करने पर यह नहीं कह सकती कि वह “सरकारी ड्यूटी” निभा रही थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर गोली चलाना पुलिस की आधिकारिक ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता.

इस मामले पर संभल पुलिस ने कहा है कि कोर्ट के आदेश के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील की जाएगी. 

Published: undefined

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT