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भरत तिवारी एनकाउंटर: सम्राट के दौर में पुलिस मुठभेड़ों का रिकॉर्ड और कई सवाल

बिहार में 'यूपी मॉडल' के तर्ज पर बढ़ते पुलिस एनकाउंटर से राज्य के भविष्य और कानून-व्यवस्था पर क्या असर होगा?

उमेश कुमार राय & Shadab Moizee
न्यूज
Published:
<div class="paragraphs"><p><strong>बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत को लेकर बिहार सरकार बैकफुट पर है.</strong></p></div>
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बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत को लेकर बिहार सरकार बैकफुट पर है.

फोटो: नौशाद मलूक/ क्विंट हिदी

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बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत को लेकर बिहार सरकार बैकफ़ुट पर है. इस घटना की चौतरफा निंदा हो रही है. भीषण जन दबाव के चलते बिहार सरकार को इस घटना की न्यायिक जांच के लिए कमेटी बनानी पड़ी.

रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में बनी एक सदस्यीय कमेटी जांच करेगी कि इस घटना की पृष्ठभूमि क्या थी और किन परिस्थितियों में ये घटना हुई. इसके साथ ही पुलिस की दलील लेते हुए कमेटी घटना की जवाबदेही तय करेगी. कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट अगले छह महीने के भीतर जमा करेगी. कमेटी का ऐलान होते ही जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा बिलौटी गाँव पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर घटना का विवरण लिया.

हालांकि यह पहली बार नहीं है कि बिहार में एनकाउंटर हुआ है. विगत कुछ महीनों में खास तौर पर गृह विभाग भाजपा नेता सम्राट चौधरी के पास जाने और फिर मई में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद एनकाउंटर की घटनाओं में तेजी आई है.

एनकाउंटर की घटनाओं में इजाफा

बिहार में नई सरकार का गठन 20 नवम्बर 2025 को हुआ था और करीब दो दशक के बाद पहली बार गृह विभाग बीजेपी के पास गया. डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गृह विभाग दिया गया. नई सरकार के गठन के अगले ही दिन 21 नवंबर 2025 को बेगूसराय के शालिग्राम गांव में पुलिस ने शिवदत्त राय नामक एक अपराधी को एनकाउंटर कर जख्मी कर दिया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नई सरकार बनने के 80 दिनों के अंदर यानी नवम्बर से जनवरी महीने के आखिर तक 10 एनकाउंटर किये गये, जिनमें से दो एनकाउंटर में आरोपी की मौत हुई और अन्य मामलों में गोली मारकर आरोपियों को जख्मी किया गया.

फिलहाल बिहार पुलिस ने एनकाउंटर को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं दिया है हालांकि क्विंट ने मीडिया में छपी खबरों और पुलिस एक्शन को लेकर कुछ जानकारी इकट्ठा की है. रिसर्च और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 से अब तक 7 महीने में यानी नई सरकार में सम्राट चौधरी को गृह विभाग मिलने और फिर बाद में सीएम बनने के बाद तक बिहार पुलिस ने कुल 23 एनकाउंटर किये. इनमें से 7 मामलों में अभियुक्तों की मृत्यु हो गई और 14 मामलों में जख्मी (हाफ एनकाउंटर).

कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों ने पुलिस पर फर्जी तरीके से एनकाउंटर कर मारने के गंभीर आरोप लगाए हैं.

विगत 28 अप्रैल को भागलपुर पुलिस ने हत्या के एक आरोपी रामधनी यादव का एनकाउंटर किया था, जिसमें यादव की मौत हो गई थी. बताया जाता है कि सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में तालाब और होर्डिंग की नीलामी को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें कथित तौर पर रामधनी यादव ने नगर परिषद के चेयरमैन पर गोली चलाई थी. बीच-बचाव करने जब कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार आये, तो उन्हें गोल लग गई और बाद में मौत हो गई. इस घटना के अगले दिन पुलिस ने मुठभेड़ में रामधनी यादव को मार देने की जानकारी दी.

लेकिन, रामधनी यादव के परिजनों का दावा है कि उनकी हिरासत में हत्या की गई और उसे एनकाउंटर बता दिया गया. रामधनी यादव की बहु बेबी कुमार ने कहा कि उन्होंने सुबह 4 बजे घर से पकड़ कर पुलिस थाने ले गई थी जबकि उन्होंने खुद सुबह 5 बजे सरेंडर करने की बात कही थी. बेबी कुमारी ने आगे दावा किया था कि थाने के भीतर ही उनके ससुर के साथ हाथापाई की गई थी और उस वक्त वह निहत्थे थे. इसके बाद पुलिस उन्हें थाने के पीछे ले गई और गोली मार दी.

17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी को भी स्थानीय पुलिस ने मुठभेड़ में मारने का दावा किया था. लेकिन उनके परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने पिस्तौल फेंककर सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारी.

भरत भूषण तिवारी ने विज्ञान से स्नातक किया था. उनके छोटे भाई चंदन तिवारी ने द क्विंट को बताया,

दोनों जांघों पर दो गोलियां लगी थीं. एक गोली पेट में और एक गोली जांघ के थोड़ा ऊपर लगी थी.

हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत को पांच गोलियां लगने की बात सामने आई है. भरत को पहली गोली बाएं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से लगी है. दूसरी गोली भी बाएं जांघ में बीच वाले भाग के भीतरी तरफ से लगी है. तीसरी गोली दाहिनी जांघ के बीच वाले हिस्से में भीतर लगी थी. चौथी गोली दाहिनी जांघ में बाहरी हिस्से से अंदर की ओर गई थी. इसके अलावा, पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की तरफ से लगी थी.

भरत भूषण तिवारी ने एनकाउंटर से पहले अपने फेसबुक पेज से कई बार लाइव वीडियो बनाया था, जिनमें वह पिस्तौल लिये हुए दिखते थे. आखिरी वीडियो, जिसमें उनका एनकाउंटर हुआ था, उसमें भी वह पिस्तौल लिये नजर आते हैं. हालांकि, भरत के पास पिस्तौल कहां से आया था, इस बारे में उनके परिजनों को कोई जानकारी नहीं है. पुलिस ने दावा किया था कि भरत के पास अवैध पिस्तौल था. भरत के भाई से जब क्विंट ने पिस्टौल रखने को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा,

इतनी जानकारी तो नहीं है कि पिस्तौल कहां से आया. वो (भरत) ये सब मामले में कुछ बताते नहीं थे हम लोगों को. जो आप सोशल मीडिया देख रहे हैं, उसी समय हम लोगों को भी पता चला.
चंदन तिवारी, भरत भूषण तिवारी के छोटे भाई

चंदन तिवारी के मुताबिक जल्द ही उनका परिवार कथित एनकाउंटर के खिलाफ दिल्ली में एक प्रदर्शन और कार्यक्रम में शामिल होने जाएगा. इस बीच, भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने एक एफआईआर दर्ज कर पुलिस कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि हथियार फेंक देने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारी. एसपी कार्यालय ने इस संबंध में प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि उक्त आवेदन के आधार पर शिकायत दर्ज कर आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है. FIR में जगदीशपुर के SDPO, शाहपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO और ऑपरेशन में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं.

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सम्राट चौधरी के बयानों का असर और पुलिस एनकाउंटर?

बिहार में एनकाउंटर की घटनाओं में बढ़ोतरी को बिहार के नये मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उन बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनमें वह पुलिस से अपराधियों से सख्ती से निपटने को कहते हैं. कुछ बयानों में वह अप्रत्यक्ष तौर पर पुलिस से ये कहते हुए नजर आते हैं कि अपराधियों को मार गिराया जाए.

गृह विभाग मिलने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी लगातार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त तेवर दिखा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा था, “अपराधी बिहार में नहीं पनपेंगे. पुलिस पूरी आजादी से कार्रवाई करे.”

अप्रैल में नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दिया और सम्राट चौधरी नये सीएम बने थे. सीएम बनने के बाद 1 मई को गयाजी जिले में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था,

बिहार सुशासन से चलेगा, कान खोलकर सुन लीजिए. बिहार में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए जो भी कदम उठाना होगा, सरकार उठाएगी. गयाजी तो पिंडदान के लिए फेमस है. कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गया. आगे भी बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकारी करती रहेगी.

22 मई को पुलिस मुख्यालय में एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा था,

एनडीए सरकार ने पुलिस को खुली छूट दे दी है. राज्य में 'सुशासन' बनाए रखना सरकार का वादा है. अच्छे शासन से कोई समझौता नहीं होगा. राज्य में कानून का राज है. अगर कोई पुलिस को चुनौती देने की हिम्मत करता है, तो उसे 48 घंटे के अंदर जवाब देने को कहा गया है.

इसी कार्यक्रम में एक आपराधिक घटना के संदर्भ में उन्होंने कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मृतक लड़की की तेरहवीं से पहले अपराधियों की तस्वीरों पर माला चढ़ जाए. उनका इशारा अपराधियों की हत्या करने की तरफ था.

पिछले 15 जून को सम्राट चौधरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपना ही एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह कह रहे हैं, “अपराधियों का या तो गयाजी में पिंडदान होते रहे या फिर वे जेल में रहें क्योंकि इसके बिना बिहार अपराधमुक्त नहीं हो सकता है. वैसे 80-90% अपराधी बिहार छोड़कर भाग गया. अगर नहीं है तो पता बताते रहिए, उनका इलाज बिहार पुलिस करती रहेगी.

जानकारों का कहना है कि अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री ऐसी बातें कहेगा, तो जाहिर तौर पर पुलिस पर इसका असर होगा और वह दबाव में काम करेगी. द क्विंट से बातचीत में प्रो. पुष्पेंद्र ने कहा, '

ये भाषा मुख्यमंत्री का नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री अगर अपराधियों का पिंडदान कराने, उनकी तस्वीरों पर माला चढ़ाने की बात करेगा, तो इससे पुलिस पर रिजल्ट देने का दबाव बनेगा और इसके लिए वह एनकाउंटर करेगी

उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने और तब से एनकाउंटर की 13 घटनाएं हो चुकी हैं, जो कि एक चिंताजनक आंकड़ा है. उन्होंने कहा,

ऐसा लगता है कि बिहार सरकार ने यूपी मॉडल अपना लिया है और राज्य को 'एनकाउंटर प्रदेश' बनाने की शुरुआत हो चुकी है.

हालांकि, पूर्व डीजीपी अभयानंद का कहना है कि मुख्यमंत्री के बयानों को हर पुलिसकर्मी अलग-अलग तरीके से देखेगा. उन्होंने कहा,

किसी पुलिसकर्मी को लगेगा कि वह जो (एनकाउंटर) कर रहा है, वह ठीक कर रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ने ऐसा कहा है. वहीं किसी अन्य को लगेगा कि वह अपने विवेक का इस्तेमाल कर काम करेगा. सीएम कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन अगर हमें काम करना है, तो हम अपने विवेक से ही करेंगे

एनकाउंटर पर नीतीश कुमार की राय क्या थी?

बिहार में एनकाउंटर की घटनाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक पुराना बयान वायरल होने लगा है, जिसमें वह उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की घटनाओं की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि अपराधियों को सजा देने का काम अदालत का है, पुलिस कैसे अपराधियों को मार सकती है.

हालांकि साल 2006 में बिहार पुलिस के एडीजी रहे अभयानंद नीतीश कुमार की एक अलग कहानी सुनाते हैं. अभयानंद नीतीश कुमार के साथ का अपना एक अनुभव साझा करते हुए कहते हैं,

नीतीश कुमार ने उस वक्त मुझसे निजी तौर पर कहा था कि पुलिस का रुतबा बहाल कर दीजिए. मैंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि पुलिस का रुतबा और पुलिस की वर्दी की गुंडागर्दी एक ही होती है. फिर मैंने उनसे कहा कि अगर आपको यह कराना है, तो किसी और से करा लीजिए, हम नहीं करेंगे. इस पर उन्होंने पूछा कि फिर यह (कानून व व्यवस्था की बहाली) कैसे होगा? मैंने कहा कि जो होगा, कानून से होगा. कानून के बाहर कुछ नहीं होगा.

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद भी एनकाउंटर कल्चर से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका कहना है कि एनकाउंटर पुलिस की नीति नहीं होती. द क्विंट के साथ बातचीत में उन्होंने कहा,

कानून की किसी भी किताब में 'एनकाउंटर' नाम का कोई शब्द नहीं है. यह केवल आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला शब्द है. एनकाउंटर प्लान करके नहीं किया जाता, यह अचानक होता है और यह पुलिस की नीति नहीं हो सकती.

जानकारों की मानें, तो एनकाउंटर की घटनाएं आने वाले दिनों में बिहारी समाज पर अलग तरह का असर डालेंगी और इससे लिंचिंग की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है.

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के पूर्व डीन प्रोफेसर पुष्पेंद्र कहते हैं,

एनकाउंटर से कानून व व्यवस्था में सुधार तो नहीं होगा, लेकिन अराजकता जरूर फैलेगी और फैल भी रही है. जब पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए लोगों को मारने लगेगी, तो आम लोग भी यही सोचेंगे कि हत्या ही अपराध का समाधान है.अब लोगों के पास गोली-बंदूक तो है नहीं, तो वे आरोपियों की लिंचिंग करेंगे. एनकाउंटर जनता को अराजक बनने के लिए प्रेरित करेगा और बिहार अंततः एक अराजक राज्य बनने की ओर बढ़ेगा.

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