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बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत को लेकर बिहार सरकार बैकफ़ुट पर है. इस घटना की चौतरफा निंदा हो रही है. भीषण जन दबाव के चलते बिहार सरकार को इस घटना की न्यायिक जांच के लिए कमेटी बनानी पड़ी.
रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में बनी एक सदस्यीय कमेटी जांच करेगी कि इस घटना की पृष्ठभूमि क्या थी और किन परिस्थितियों में ये घटना हुई. इसके साथ ही पुलिस की दलील लेते हुए कमेटी घटना की जवाबदेही तय करेगी. कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट अगले छह महीने के भीतर जमा करेगी. कमेटी का ऐलान होते ही जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा बिलौटी गाँव पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर घटना का विवरण लिया.
बिहार में नई सरकार का गठन 20 नवम्बर 2025 को हुआ था और करीब दो दशक के बाद पहली बार गृह विभाग बीजेपी के पास गया. डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गृह विभाग दिया गया. नई सरकार के गठन के अगले ही दिन 21 नवंबर 2025 को बेगूसराय के शालिग्राम गांव में पुलिस ने शिवदत्त राय नामक एक अपराधी को एनकाउंटर कर जख्मी कर दिया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नई सरकार बनने के 80 दिनों के अंदर यानी नवम्बर से जनवरी महीने के आखिर तक 10 एनकाउंटर किये गये, जिनमें से दो एनकाउंटर में आरोपी की मौत हुई और अन्य मामलों में गोली मारकर आरोपियों को जख्मी किया गया.
फिलहाल बिहार पुलिस ने एनकाउंटर को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं दिया है हालांकि क्विंट ने मीडिया में छपी खबरों और पुलिस एक्शन को लेकर कुछ जानकारी इकट्ठा की है. रिसर्च और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 से अब तक 7 महीने में यानी नई सरकार में सम्राट चौधरी को गृह विभाग मिलने और फिर बाद में सीएम बनने के बाद तक बिहार पुलिस ने कुल 23 एनकाउंटर किये. इनमें से 7 मामलों में अभियुक्तों की मृत्यु हो गई और 14 मामलों में जख्मी (हाफ एनकाउंटर).
विगत 28 अप्रैल को भागलपुर पुलिस ने हत्या के एक आरोपी रामधनी यादव का एनकाउंटर किया था, जिसमें यादव की मौत हो गई थी. बताया जाता है कि सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में तालाब और होर्डिंग की नीलामी को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें कथित तौर पर रामधनी यादव ने नगर परिषद के चेयरमैन पर गोली चलाई थी. बीच-बचाव करने जब कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार आये, तो उन्हें गोल लग गई और बाद में मौत हो गई. इस घटना के अगले दिन पुलिस ने मुठभेड़ में रामधनी यादव को मार देने की जानकारी दी.
लेकिन, रामधनी यादव के परिजनों का दावा है कि उनकी हिरासत में हत्या की गई और उसे एनकाउंटर बता दिया गया. रामधनी यादव की बहु बेबी कुमार ने कहा कि उन्होंने सुबह 4 बजे घर से पकड़ कर पुलिस थाने ले गई थी जबकि उन्होंने खुद सुबह 5 बजे सरेंडर करने की बात कही थी. बेबी कुमारी ने आगे दावा किया था कि थाने के भीतर ही उनके ससुर के साथ हाथापाई की गई थी और उस वक्त वह निहत्थे थे. इसके बाद पुलिस उन्हें थाने के पीछे ले गई और गोली मार दी.
17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी को भी स्थानीय पुलिस ने मुठभेड़ में मारने का दावा किया था. लेकिन उनके परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने पिस्तौल फेंककर सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारी.
भरत भूषण तिवारी ने विज्ञान से स्नातक किया था. उनके छोटे भाई चंदन तिवारी ने द क्विंट को बताया,
हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत को पांच गोलियां लगने की बात सामने आई है. भरत को पहली गोली बाएं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से लगी है. दूसरी गोली भी बाएं जांघ में बीच वाले भाग के भीतरी तरफ से लगी है. तीसरी गोली दाहिनी जांघ के बीच वाले हिस्से में भीतर लगी थी. चौथी गोली दाहिनी जांघ में बाहरी हिस्से से अंदर की ओर गई थी. इसके अलावा, पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की तरफ से लगी थी.
भरत भूषण तिवारी ने एनकाउंटर से पहले अपने फेसबुक पेज से कई बार लाइव वीडियो बनाया था, जिनमें वह पिस्तौल लिये हुए दिखते थे. आखिरी वीडियो, जिसमें उनका एनकाउंटर हुआ था, उसमें भी वह पिस्तौल लिये नजर आते हैं. हालांकि, भरत के पास पिस्तौल कहां से आया था, इस बारे में उनके परिजनों को कोई जानकारी नहीं है. पुलिस ने दावा किया था कि भरत के पास अवैध पिस्तौल था. भरत के भाई से जब क्विंट ने पिस्टौल रखने को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा,
चंदन तिवारी के मुताबिक जल्द ही उनका परिवार कथित एनकाउंटर के खिलाफ दिल्ली में एक प्रदर्शन और कार्यक्रम में शामिल होने जाएगा. इस बीच, भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने एक एफआईआर दर्ज कर पुलिस कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि हथियार फेंक देने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारी. एसपी कार्यालय ने इस संबंध में प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि उक्त आवेदन के आधार पर शिकायत दर्ज कर आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है. FIR में जगदीशपुर के SDPO, शाहपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO और ऑपरेशन में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं.
बिहार में एनकाउंटर की घटनाओं में बढ़ोतरी को बिहार के नये मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उन बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनमें वह पुलिस से अपराधियों से सख्ती से निपटने को कहते हैं. कुछ बयानों में वह अप्रत्यक्ष तौर पर पुलिस से ये कहते हुए नजर आते हैं कि अपराधियों को मार गिराया जाए.
गृह विभाग मिलने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी लगातार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त तेवर दिखा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा था, “अपराधी बिहार में नहीं पनपेंगे. पुलिस पूरी आजादी से कार्रवाई करे.”
अप्रैल में नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दिया और सम्राट चौधरी नये सीएम बने थे. सीएम बनने के बाद 1 मई को गयाजी जिले में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था,
22 मई को पुलिस मुख्यालय में एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा था,
इसी कार्यक्रम में एक आपराधिक घटना के संदर्भ में उन्होंने कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मृतक लड़की की तेरहवीं से पहले अपराधियों की तस्वीरों पर माला चढ़ जाए. उनका इशारा अपराधियों की हत्या करने की तरफ था.
पिछले 15 जून को सम्राट चौधरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपना ही एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह कह रहे हैं, “अपराधियों का या तो गयाजी में पिंडदान होते रहे या फिर वे जेल में रहें क्योंकि इसके बिना बिहार अपराधमुक्त नहीं हो सकता है. वैसे 80-90% अपराधी बिहार छोड़कर भाग गया. अगर नहीं है तो पता बताते रहिए, उनका इलाज बिहार पुलिस करती रहेगी.
जानकारों का कहना है कि अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री ऐसी बातें कहेगा, तो जाहिर तौर पर पुलिस पर इसका असर होगा और वह दबाव में काम करेगी. द क्विंट से बातचीत में प्रो. पुष्पेंद्र ने कहा, '
उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने और तब से एनकाउंटर की 13 घटनाएं हो चुकी हैं, जो कि एक चिंताजनक आंकड़ा है. उन्होंने कहा,
हालांकि, पूर्व डीजीपी अभयानंद का कहना है कि मुख्यमंत्री के बयानों को हर पुलिसकर्मी अलग-अलग तरीके से देखेगा. उन्होंने कहा,
बिहार में एनकाउंटर की घटनाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक पुराना बयान वायरल होने लगा है, जिसमें वह उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की घटनाओं की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि अपराधियों को सजा देने का काम अदालत का है, पुलिस कैसे अपराधियों को मार सकती है.
हालांकि साल 2006 में बिहार पुलिस के एडीजी रहे अभयानंद नीतीश कुमार की एक अलग कहानी सुनाते हैं. अभयानंद नीतीश कुमार के साथ का अपना एक अनुभव साझा करते हुए कहते हैं,
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद भी एनकाउंटर कल्चर से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका कहना है कि एनकाउंटर पुलिस की नीति नहीं होती. द क्विंट के साथ बातचीत में उन्होंने कहा,
जानकारों की मानें, तो एनकाउंटर की घटनाएं आने वाले दिनों में बिहारी समाज पर अलग तरह का असर डालेंगी और इससे लिंचिंग की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है.
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के पूर्व डीन प्रोफेसर पुष्पेंद्र कहते हैं,