भारत, तुम इतिहास को वर्तमान पर भार बनते देख रहे हो!

जो भी हो, यह तुम्हारी परीक्षा की घड़ी है. इस युद्ध में तुम और मजबूर होकर निकलोगे.

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तू हमेशा-हमेशा आबाद रहे
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भारत! मेरे प्यारे वतन

तू हमेशा-हमेशा आबाद रहे

तुमने इतिहास का हर दौर देखा है

इतिहास को वर्तमान पर भार बनते पहली बार देख रहे हो. बेरोजगारी, कुपोषण, अशिक्षा, मूर्खता से लड़ने की बजाय सैकड़ों साल पुराने मुद्दों पर लोगों को मनुष्य से फिर जानवर बनते तुम पहली बार देख रहे हो.

तुम जातिवाद की सड़ांध के खिलाफ अपनी अंतिम लड़ाई लड़ने जा रहे हो. अच्छा है, बहुत अच्छा है. आखिरकार लोकतंत्र की असलियत सामने आ ही गई. अब या तो भारतीय पहचान बचेगी या फिर जातीय पहचान.

जो भी हो, यह तुम्हारी परीक्षा की घड़ी है. इस युद्ध में तुम और मजबूर होकर निकलोगे.

अब असली कैंसर के लक्षण साफ-साफ दिखाई देने लगे हैं. सीरिया, इराक जैसा समय अवश्य तुम देखोगे, पर इसमें सच ही जीतेगा. यही तो विकासवाद है.

हिम्मत जुटाओ, तुम कृष्ण की भूमि हो.

मत घबराओ, तुम बुद्ध की माटी हो.

साजिश और झूठ तुम्हें न मिटा सके हैं, न मिटा सकेंगे.

तुम्हारा यह समय युगांतरकारी रहनुमाओं के उभार का समय है. फिर कोई बुद्ध, कोई कबीर, कोई ज्योतिबा फुले, कोई भगत सिंह, कोई अम्बेडकर, नायक बनकर आने वाला है.

तुम्हारा अपना

विरोचन

भारत, तुम इतिहास को वर्तमान पर भार बनते देख रहे हो!
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