यह धरा कुछ कहती है

India is our mother.

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रुग्ण होती मां अगर, तज के उसे जाते क्या ।अपनी सांसों के रहते, उसे दवा नहीं दिलाते क्या ।
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सुनाई देते हैं तुम्हें केवल रुदन और क्रंदन ।

प्रयत्न करो, सुनेंगे पुल्कित मन के स्पंदन ।।

परिस्थितियाँ नहीं रहती एक सी कभी ।

अच्छी कहीं, बुरी कहीं, गलत कभी, सही कभी ।।

मनुज तू इतना हताश क्यों ।

तेरा मन इतना निराश क्यों ।।

रुग्ण होती मां अगर, तज के उसे जाते क्या ।

अपनी सांसों के रहते, उसे दवा नहीं दिलाते क्या ।।

यह जन्मभूमि क्या माँ नहीं तुम्हारी ।

करो कुछ, उसकी दशा जाए संवारी ।।

भाग्य को नहीं संवारता, हर समय का कोसना ।

मात्र पुरुषार्थ ही हल है, हमें अब है सोचना ।।

समय है अब देश के लिए हड्डियां गलाने का ।

आओ प्रण करें सभी, दधीचि बन जाने का ।।

- डा. अश्विनी कुमार सेतिया

यह धरा कुछ कहती है

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