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अज्ञात पार्ट 1:महिलाओं की टुकड़ों में मिली लाशें, कहीं जांच बंद,तो कहीं केस नहीं

उत्तर प्रदेश में महिलाओं की क्षत-विक्षत मिली लाशों पर क्विंट हिंदी की स्पेशल सीरीज - अज्ञात

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(UP में कई ऐसे मामले हैं, जब पुलिस को बुरी तरह क्षत-विक्षत लाश मिली. लाश किसकी थी, किसने हत्या को अंजाम दिया, कुछ पता नहीं चल सका. क्विंट हिंदी ऐसे ही मामलों पर तीन पार्ट की 'अज्ञात' सीरीज लेकर आया है. इस तरह की इन्वेस्टिगेशन आपकी मदद से ही संभव है. क्विंट हिंदी के मेंबर बनकर हमें सपोर्ट करें. मेंबर बनने के लिए यहां क्लिक करें.)

श्रद्धा वालकर और निक्की यादव मर्डर केस में दिल्ली पुलिस तत्परता से जांच कर रही है. मीडिया समेत आम लोगों की निगाहें इन केसों पर हैं और दिल्ली पुलिस इस मामले में तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. लेकिन क्या सभी ऐसे महिला संबंधी गंभीर अपराधों में पुलिस इतनी ही तत्परता से जांच करती हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए क्विंट हिंदी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में गया, जहां पर महिलाओं, युवती और बच्चियों के साथ जघन्य अपराध हुए. उनकी हत्या हुई, कई मामलों उनके शरीर के टुकड़े किए गए और उनके सिर तक गायब मिले. इन मामलों में जांच की क्या स्थिति है और क्या पुलिस को अभी तक कोई सफलता मिल पाई है? इन मामलों की पड़ताल करने पहुंची क्विंट हिंदी की टीम का पहला पड़ाव है पश्चिम उत्तर प्रदेश का जिला मेरठ.

दिन 26 अक्टूबर 2020. हल्की सर्दी मौसम में घुल चुकी थी और बाकी दिनों की तरह ही मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना अंतर्गत फतेहउलापुर क्षेत्र के लोग अपने नित काम में लगे थे. सुबह का समय था और कुछ लोग श्मशान घाट से होकर निकल रहे थे, तभी उनकी नजर संदिग्ध रूप से पड़े एक बोरे की तरफ गई. जब पास जाकर लोगों ने उस बोरे को देखा तो उनको एहसास हुआ उसके अंदर कोई इंसानी लाश पड़ी हुई है. लाश मिलने की बात सुनते ही यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और घटनास्थल पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई. वहां मौजूद लोगों में से किसी ने स्थानीय लिसाड़ी गेट थाना को सूचना दी और पुलिस मौके पर पहुंची.

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पुलिस वालों ने जब बोरे को खोला तो सब सन्न रह गए. बोरी के अंदर कई टुकड़ों में एक महिला की लाश थी. उसका सिर गायब था और लाश तकरीबन 8 से 10 टुकड़ों में थी.

इस सनसनीखेज घटना की सूचना आला अधिकारियों को दी गई जो मौके पर पहुंचे और फिर जांच शुरू हुई. जांच के लिहाज से सबसे जरूरी था कि उस महिला का सिर बरामद होना ताकि पुलिस को महिला की पहचान करने में मदद मिल जाए. सिर बरामद करने के लिए पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन शुरू की, स्थानीय लोगों से पूछताछ हुई और सीसीटीवी भी खंगाले गए, लेकिन 2 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है पुलिस को अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है.

क्विंट हिंदी की टीम जब इस मामले में जांच की स्थिति पता करने के लिए मेरठ पहुंची तो पता चला इस मामले में जांच ठंडे बस्ते में जा चुकी है. आधिकारिक तौर पर पुलिस ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट प्रेषित कर दी है और स्थाई रूप से जांच बंद हो गई है.

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पुलिस ने जांच में नहीं दिखाई दिलचस्पी?

घटना के बाद पुलिस ने एक स्थानीय निवासी के तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या (302) और सबूत छुपाने (201) कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं में लिसाड़ी गेट थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया. इस सनसनीखेज मामले की जांच की पर्यवेक्षण कर रहे तत्कालीन सर्कल ऑफिसर अरविंद चौरसिया के मुताबिक पुलिस ने महिला की पहचान के लिए अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली.

"लाश करीबन 8 से 10 टुकड़ों में थी. सिर गायब था इसलिए पहचान करने में ज्यादा समस्या हुई और अंत में पहचान हो भी नहीं पाई. इसमें पुलिस ने घटनास्थल का BTS (Base Tranaseiver Station) डाटा लिया. आसपास के क्षेत्रों समेत अगल बगल के राज्यों से गायब हुई महिलाओं के बारे में पता कर जानकारी ली गई, लेकिन कोई लाभप्रद सूचना नहीं मिल पाई. मृतक महिला की फिंगरप्रिंट लेकर गायब हुई महिलाओं के आधार कार्ड के बायोमैट्रिक डिटेल से मैच कराने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली."
तत्कालीन सर्कल ऑफिसर अरविंद चौरसिया
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लिसाड़ी गेट के स्थानीय निवासी मेहराब आलम की मानें तो इस केस की जांच कर रहे तत्कालीन जांच अधिकारी प्रशांत कपिल ने इस केस में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. मेरठ के आला अधिकारियों ने भी इस मामले में पुलिस जांच में बढ़ती जा रही शिथिलता को लेकर जांच अधिकारी को पत्र भी लिखा, लेकिन अंततः बिना किसी सफलता के इस केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई. आज भी रहस्य बना हुआ है कि वह महिला कौन थी, उसकी निर्मम हत्या करके किसने उसके शव को श्मशान घाट में ठिकाने लगा दिया?

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नाले में मिली टुकड़ों में लाश, नहीं दर्ज हुआ मुकदमा

मेरठ में दूसरी ऐसी सनसनीखेज घटना शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले लालकुर्ती थाना अंतर्गत छावनी क्षेत्र में हुई. 6 जुलाई 2022 की शाम को एक महिला की सड़ी गली लाश क्षेत्र के ही एक नाले से बरामद हुई. उस महिला का सिर समेत कई अंग गायब थे और पुलिस की मानें तो वह शव तकरीबन 20 से 25 दिन पुराना था. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसको पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

घटना के 4 महीने बीत जाने के बाद जब जांच की स्थिति जानने के लिए क्विंट हिंदी की टीम लालकुर्ती थाने पहुंची तो पता चला कि इस मामले में पुलिस ने मुकदमा तक दर्ज नहीं किया. यह मामला पुलिस दस्तावेजों में एक अज्ञात लाश मिलने तक सीमित रह गया है.

एक अज्ञात महिला की लाश नाले में पड़ी मिलती है और पुलिस ने मुकदमा तक दर्ज नहीं किया. इस सवाल के साथ जब हम मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि इस मामले में मुकदमा इसलिए नहीं दर्ज किया गया, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया था कि मौत का कारण क्या था.

विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे गंभीर अपराधों में मुकदमा ना दर्ज करना भी एक अपराध है.

"जिस थाना अंतर्गत ऐसी घटना हुई और मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो पुलिसकर्मियों ने इसे छुपाया है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. हत्या जैसे जघन्य अपराध को छुपाना भी एक अपराध है."
सुधीर कुमार, रिटायर्ड उप-पुलिस अधीक्षक
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महिलाओं की हत्या: पीड़िता अज्ञात, आरोपी अज्ञात

जिन दो मामलों की बात हमने अभी तक की है, उन दोनों मामलों के अलावा भी कई ऐसे मामले हैं, जिनमें महिलाओं की निर्मम हत्या के बाद उनके शवों को ठिकाने लगा दिया गया. इन सभी मामलों में अभी तक न पीड़ित की पहचान हो पाई है और न ही आरोपी की.

साल 2021 में मेरठ के खरखौदा क्षेत्र में एक महिला की लाश बक्से में मिली.

जांच की स्थिति: महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई है.

मार्च 2022 में मेरठ के मुंडाली क्षेत्र में एक महिला की हत्या करके शव को जला दिया गया.

जांच की स्थिति: महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई है.

उत्तर प्रदेश के कई ऐसे हिस्से हैं जो अब हत्या के बाद डंपिंग ग्राउंड की तरह इस्तेमाल होने लगे हैं. लोगों की हत्या होती है जिसमें महिलाएं सबसे ज्यादा शामिल है, इनके शवों को हाईवे किनारे कहीं सुनसान इलाके या खेतों में ठिकाने लगा दिया जाता है. पहचान मिटाने के लिए इनके शवों के कई टुकड़े कर के सिर गायब कर दिया जाता है या फिर इनके चेहरे को जला दिया जाता है.

अभी भी कई ऐसे मामले हैं, जिसमें पुलिस कातिलों तक पहुंचना तो दूर, पीड़ित की पहचान तक नहीं कर पाई है और जांच की स्थिति देखकर या कहा भी नहीं जा सकता कि कब तक इन महिलाओं को इंसाफ मिलेगा.

अज्ञात पार्ट 2 और अज्ञात पार्ट 3 यहां पढ़ें

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