हिन्दुस्तान मुल्क हूँ, अब आज़ाद हूँ मैं

कई हिस्सों में बर्बाद हूँ मैं, पर मुल्क हूँ, आज़ाद हूँ मैं।

Updated08 Aug 2017, 12:54 PM IST
BOL
1 min read
BOL LOVE YOUR BHASHA

कई हिस्सों में बर्बाद हूं मैं,

पर मुल्क हूँ, आज़ाद हूं मैं,

हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,

कहने को हैं, भाई भाई,

बाँट ली धरती और आसमान,

लकीर के पीछे ले लें जान,

दंगे दंगे करते हैं,

न जाने कितने मरते हैं,

हिन्दू है तो कौन-सा वाला, 2

मैं गोरा हूँ या तू काला,

जाति से आबाद हूं मैं,

पर मुल्क हूँ आज़ाद हूं मैं,

औरत का क्या मान है,

क्या उसकी एक पहचान है,

वो पीछे छुपती रहती है,

इज़्ज़त पे धब्बे सहती है,

कम उम्र हो या हो ज़्यादा,

बना दी है उसकी मर्यादा,

पहले इसका सम्मान करो,

फिर आगे मेरा नाम करो,

बेज़ुबान, बेआवाज़ हूं मैं,

पर मुल्क हूँ, आज़ाद हूं मैं,

बस ये जानू, बस ये मांगू,

खुलके सांस मैं लेना चाहूं,

गर छोड़ दो करना तेरा मेरा,

फिर होगा एक नया सवेरा,

जय जवान या जय किसान,

एक हो जाये सारे इंसान,

रंजिश हो न कोई लड़े,

बेटा-बेटी सारे पढ़ें,

शान से कहूंगा, एक आगाज़ हूं मैं,

हिन्दुस्तान मुल्क हूं, अब आज़ाद हूं मैं

(This article was sent to The Quint by Shalini Gupta for our Independence Day campaign, BOL – Love your Bhasha.

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Published: 31 Jul 2017, 08:06 AM IST
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