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मुसलमानों के एक ग्रुप का बर्तन चाटने वाला वीडियो कितना सच्चा?

कोरोना वायरस को लेकर इंटरनेट फर्जी खबरों से भरा पड़ा है

कृतिका गोयल
वेबकूफ
Updated:
कोरोना वायरस को लेकर इंटरनेट फर्जी खबरों से भरा पड़ा है
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कोरोना वायरस को लेकर इंटरनेट फर्जी खबरों से भरा पड़ा है
(फोटो: क्विंट हिंदी)
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वीडियो एडिटर: संदीप सुमन

फर्जी इलाज, नुस्खे, बचाव के गैर प्रमाणिक तरीके और हेरफेर किया गया कंटेंट... कोरोना वायरस को लेकर इंटरनेट फर्जी खबरों से भरा पड़ा है. और अब, नकली दावों और पुराने वीडियो का इस्तेमाल करके सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले मैसेज और वायरल पोस्ट की भरमार है.

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मिसाल के तौर पर इस वीडियो को ही ले लीजिए. इसमें मुस्लिम लोगों का एक ग्रुप बर्तन चाट रहा है. कहा ये जा रहा है कि वे कोरोना वायरस फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. याद रखिए, ये वायरस संक्रमित इंसान के खांसने या छींकने पर उसके नाक या मुंह से जो ड्रॉपलेट्स निकलते हैं उनसे फैलता है.

और जब इस तरह के वीडियो को बिना किसी कॉन्टेक्स्ट  के सर्कुलेट किया जाता है, तो हर कोई उस पर आसानी से यकीन भी कर लेता है.

एक मिनट और कुछ सेकेंड के इस वीडियो के साथ ये भी दावा किया गया है कि ये मुस्लिम लोग अलग-अलग देशों के हैं और भारत के अलग-अलग हिस्सों में फैले हुए हैं. मैसेज के मुताबिक, उन्हें एक टेस्टिंग सेंटर ले जाया गया. लेकिन वहां जाने से पहले उन्हें 'कोरोना वायरस फैलाने के इरादे से चम्मच और प्लेटों पर अपना सलाइवा मिलाते हुए देखा गया.’

ये वीडियो फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और यहां तक कि वॉट्सऐप पर भी खूब शेयर किया गया. लेकिन यहां जो दिख रहा है, सच्चाई उससे बिलकुल अलग है.

सबसे पहले हमने इस वीडियो को ट्रेस किया, तो पता चला कि ये जुलाई 2018 का है, यानि COVID-19 का प्रकोप फैलने से बहुत पहले का. दूसरी बात, वीडियो में दिख रहे लोग दाउदी बोहरा समुदाय के हैं, जो बर्तन चाटकर दरअसल एक रस्म निभा रहे हैं ताकि खाने की जीरो वेस्टेज हो.. ये उनकी परंपरा का एक हिस्सा है.

लेकिन हमने इस वीडियो की ‘चोरी’ कैसे पकड़ी?

हमने गूगल पर सिंपल कीवर्ड सर्च किया, जिससे हम इस पुराने वीडियो तक पहुंचे. इससे हम ये जान गए कि ये हाल-फिलहाल की घटना नहीं है. वहां से इशारा लेते हुए, हमने दाउदी बोहरा की वेबसाइट पर इस परंपरा की और जानकारी ली. वेबसाइट बताती है कि दाउदी बोहरा समुदाय के लोग स्टील के थाल (यानी एक बड़ी प्लेट, जिसमें 8 से 9 लोग खाना खा सकते हैं) पर खाना खाते हैं और खाने की बर्बाद नहीं करने की पॉलिसी का सख्ती से पालन करते हैं.

इस तरह हमें पता चला कि सर्कुलेट हो रहा वीडियो पुराना है और किए जा रहे दावों से बिलकुल अलग है. अब अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसे ऑनलाइन फॉरवर्डेड वीडियो या वॉट्सऐप पर मिली किसी जानकारी का आगे से क्या करना है, तो याद रखिए-

रुकिए, सोचिए, वेरिफाई कीजिए और उसके बाद ही फॉरवर्ड कीजिए

और अगर आप नहीं जानते कि ये कैसे करना है, तो इसे WebQoof@thequint.com पर हमें भेजिए और हम इसे आपके लिए वेरिफाई करेंगे.

Published: 06 Apr 2020,11:24 AM IST

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