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प्रदर्शनों के बीच अन्ना आंदोलन याद करते हुए निशिकांत दुबे ने गलत दावा कर दिया

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि अन्ना आंदोलन को भाजपा ने समर्थन नहीं दिया था

Siddharth Sarathe
वेबकूफ
Published:
<div class="paragraphs"><p>X पोस्ट पर निशिकांत दुबे का दावा</p></div>
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X पोस्ट पर निशिकांत दुबे का दावा

सोर्स : स्क्रीनशॉट/X/Altered by The Quint

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन जारी हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने एक दावा किया. अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट पर निशिकांत दुबे ने लिखा

''जब अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बनने का अनशन कर रहे थे तथा कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल कभी तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी जी,विलासराव देशमुख जी बार बार बातचीत कर रहे थे. भाजपा ने कभी भी उस आंदोलन का साथ नहीं दिया,हम कभी भी जंतर मंतर नहीं गए,नतीजा मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी. राहुल गांधी जी फिर वही गलती कर रहे हैं,भगवान उनको सदबुद्धी दें''

पोस्ट का अर्काइव यहां देखें 

सोर्स : स्क्रीनशॉट/X

क्या ये सच है ? : अन्ना आंदोलन का समर्थन दिवंगत अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, राजनाथ सिंह, नरेंद्र मोदी जैसे कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने किया था.

  • हालांकि, बीजेपी ने अन्ना की तरफ से सुझाए गए लोकपाल बिल के कुछ बिंदुओं को लेकर आपत्ति जताई थी. पर आंदोलन में पार्टी नेताओं ने खुलकर समर्थन किया था. अरुण जेटली ने स्पष्ट भी किया था कि वो अन्ना को एक राजनेता के रूप में समर्थन नहीं करते, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अन्ना के आंदोलन में वो पूरी तरह साथ हैं.

  • अन्ना हजारे को जब दिल्ली पुलिस की तरफ से हिरासत में लिया गया, तो इसके विरोध में बीजेपी ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन भी किया था. संसद में भी इस मुद्दे को बीजेपी ने उठाया था.

हमने ये सच कैसे पता लगाया ? : हमें 4 अप्रैल 2011 को बीजेपी की तरफ से जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति देखी. ये विज्ञप्ति बीजेपी की आधिकारिक वेबसाइट पर आज भी उपलब्ध है. इसमें लिखा है कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन हड़ताल का समर्थन किया है.

बीजेपी की 4 अप्रैल 2011 की प्रेस विज्ञप्ति

सोर्स : स्क्रीनशॉट/BJP

निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया है कि बीजेपी नेता कभी अन्ना हजारे से मिलने जंतर मंतर नहीं गए, इसका सच जानते हैं.

अप्रैल 2011: राजनेताओं के लिए मंच पर 'नो-एंट्री' : 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने जब जंतर-मंतर पर पहली बार अनशन शुरू किया, तब 'टीम अन्ना' ने आंदोलन को गैर-राजनीतिक रखने के लिए राजनेताओं के मंच साझा करने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

मेनका गांधी और प्रकाश जावड़ेकर की मौजूदगी : बीजेपी नेता मेनका गांधी और प्रकाश जावड़ेकर एकजुटता जताने जंतर-मंतर पहुंचे. वे धरना स्थल पर मौजूद रहे, लेकिन मंच से कोई भाषण नहीं दिया.

उमा भारती का विरोध : बीजेपी नेता उमा भारती जब आंदोलन को समर्थन देने जंतर-मंतर पहुंचीं, तो प्रदर्शनकारियों ने उनका विरोध किया, जिसके बाद उमा भारती को मंच से दूर ही रहना पड़ा.

सोर्स : स्क्रीनशॉट/News 18

11 दिसंबर 2011 : खुली बहस के लिए मंच पर पहुंचे अरुण जेटली : संसदीय स्थायी समिति की लोकपाल रिपोर्ट के विरोध में अन्ना हजारे ने एक दिन का सांकेतिक उपवास रखा. इस बार 'टीम अन्ना' ने खुद विपक्षी दलों को खुली बहस के लिए मंच पर आमंत्रित किया था.

  • राज्यसभा में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली जंतर-मंतर पहुंचे और उन्होंने अन्ना हजारे व अन्य विपक्षी नेताओं (वृंदा करात, शरद यादव) के साथ मंच साझा किया. जेटली ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए एक सशक्त लोकपाल को लेकर बीजेपी के रुख के बारे में बताया. इंडिया टुडे की इस फोटो स्टोरी में अरुण जेटली को मंच पर अन्ना हजारे के साथ देखा जा सकता है.

सोर्स : स्क्रीनशॉट/India Today/PTI

अरुण जेटली ने ये भी स्पष्ट किया था कि बीजेपी को अन्ना हजारे के किन प्रस्तावों से असहमति है. उसके बारे में हम विस्तार से आगे बताएंगे.

बीजेपी के शीर्ष नेताओं का समर्थन

इंदौर हवाई अड्डे पर तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रेस से बात करते हुए ऐलान किया कि "भाजपा अन्ना के साथ है" .

बीजेपी के नियंत्रण वाले दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अन्ना के अनशन के लिए पूरे रामलीला मैदान में बड़े स्तर पर सफाईकर्मी, मोबाइल बायो-टॉयलेट, पीने के पानी के टैंकर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए थे.

26 अगस्त 2011 को अन्ना आंदोलन के प्रमुख चेहरे अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण लालकृष्ण आडवाणी के आवास पहुंचे. इस बैठक में बीजेपी नेता नितिन गडकरी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने टीम अन्ना की मुख्य शर्तों को संसद में उठाने की लिखित सहमति दी.

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अन्ना हजारे को हिरासत में लेने पर BJP का सड़क से संसद तक विरोध

तत्कालीन नेता विपक्ष दिवंगत सुषमा स्वराज ने 17 अगस्त 2011 को सदन में अन्ना हजारे को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया था. उनके भाषण का वो हिस्सा ये रहा,

मैं पूछना चाहती हूं प्रधान मंत्री जी कि आपने बार-बार इस वक्तव्य में दिल्ली पुलिस का नाम लिया. कल इस सरकार के चार-चार मंत्री चैनलों पर जाकर सरकार का बचाव क्या कहते हुए कर रहे थे कि हमें क्या मालूम, पुलिस कमिश्नर जाने. जब माननीय चिदम्बरम जी से पूछा गया कि अन्ना हजारे कहां हैं तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता, पुलिस कमिश्नर से पूछो? माननीय मंत्री जी, आप सदन से जा क्यों रहे हैं, आपने कहा था कि मुझे नहीं पता, पुलिस कमिश्नर से पूछो. ( व्यवधान) कल रात को चैनल पर नारायण सामी, अम्बिका सोनी बार-बार कह रहे थे कि मजिस्ट्रेट से पूछो कि क्यों उनको बंद किया, क्यों उनको रिहा किया और आज माननीय प्रधानमंत्री जी ने वही की वही बात यहां लिख दी. सुबह तो मजिस्ट्रेट को यह लग रहा था क्योंकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि वे शांति भंग कर देंगे, उनका आंदोलन हिंसक हो जाएगा, इसलिए उन्हें सात दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया. लेकिन शाम को दिल्ली पुलिस को लगा कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि उन्होंने एक याचिका डाल दी, इसलिए उन्हें छोड़ दिया. अध्यक्ष जी, यह सरकार अनिर्णय की स्थिति में है और यह सरकार अपने लिए निर्णय भी ओट नहीं पाती.
संसद में दिवंगत बीजेपी नेता सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज के उठाए गए सवालों के जवाब में कांग्रेस सांसद संजय निरूपम ने सदन में कहा,

क्या कल जो कार्रवाई हुई, ऐसी कार्रवाइयों के बारे में देश के प्रधानमंत्री निर्णय लिया करते हैं? क्या देश के गृहमंत्री निर्णय लेंगे?  कानून और व्यवस्था की स्थापना करना, सी.आर.पी.सी. और आई.पी.सी. को लागू करना यह पुलिस महकमे का काम है, उसकी जिम्मेदारी है. उस जिम्मेदारी के तहत ससम्मान पूरे इज्ज़त के साथ अन्ना जी को हिरासत में लिया गया और कल रात को उनकी रिहाई का वारंट भी आ गया। अन्ना जी ने कहा कि उन्हें अनशन करना है. किसी भी व्यक्ति को अनशन करने का हक है. इस विषय पर कोई एतराज़ नहीं है. हमारा सिर्फ इतना कहना है कि इसके संबंध में पूरी प्रकिया चल रही है. उस प्रक्रिया को पूरा होने दीजिए. उसके बाद जो एक प्रोडक्ट निकल कर आएगा, एक फाइनल बिल का ड्राफ्ट निकल कर आएगा, जिसको बाद में पार्लियामेंट में पास करने के लिए हम प्रस्तुत करने जाएंगे, अगर उसमें कोई एतराज़ है तो बिल्कुल अपना मतभेद जाहिर करना चाहिए.
17 अगस्त 2011 को संसद में कांग्रेस सांसद संजय निरूपम

पूर्व भाजपा अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू, तत्कालीन सांसद नवजोत सिंह सिद्धू, प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर से संसद की ओर कैंडल मार्च निकाला. संसद मार्ग थाने के पास पुलिस ने उन्हें रोका और लगभग 2,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.

महाराष्ट्र के भंडारा जिले में बीजेपी और पार्टी के यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने सड़कों पर उतरकर उग्र विरोध प्रदर्शन किया.

राजस्थान के अजमेर और जयपुर में स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला.

सोर्स : स्क्रीनशॉट/India Today

किन मुद्दों पर थी असहमति ?

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी 5 सितंबर 2011 की रिपोर्ट में काफी विस्तार से बताया गया है कि किन मुद्दों पर बीजेपी को अन्ना के सुझाए गए लोकपाल के नियमों से असहमति थी. पर इस रिपोर्ट के मुताबिक, अरुण जेटली ने ये भी स्पष्ट किया था कि वो भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में पूरी तरह साथ हैं. रिपोर्ट में ये जरूरी बिंदू सामने आते हैं,

  • प्रतीक माना, नेता नहीं: अरुण जेटली ने साफ किया कि बीजेपी अन्ना हजारे को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का प्रतीक मानती है, उनका राजनीतिक नेतृत्व स्वीकार नहीं करती.

  • संवैधानिक मर्यादा पर नो-कॉम्प्रोमाइज: पार्टी बातचीत में कुछ चर्चा यानी नेगोशिएशन या यूं कहें कि लचीलेपन के लिए तैयार थी, लेकिन संविधान के बुनियादी सिद्धांतों से समझौता कोई समझौता न करने की शर्त पर.

  • मसौदे की इन शर्तों पर कड़ा ऐतराज था:

    • उच्च न्यायपालिका को लोकपाल के अधीन लाना.

    • संसद के भीतर सांसदों के संवैधानिक विशेषाधिकार छीनना.

    • लोकपाल को अनियंत्रित फोन-टैपिंग का अधिकार देना.

  • CBI का मुद्दा: जेटली ने CBI को लोकपाल के अधीन करने के बजाय उसे स्वतंत्र और स्वायत्त (Autonomous) संस्था बनाए रखने की वकालत की.

निष्कर्ष : निशिकांत दुबे का ये दावा सच नहीं है कि अन्ना आंदोलन का समर्थन बीजेपी ने नहीं किया था.

अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर  9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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