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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्य के दौरान सोशल मीडिया पर फर्जी AI जेनरेटेड फोटो और भ्रामक दावों के प्रसार के बाद पुलिस ने आठ एफआईआर दर्ज की है. इन मामलों में आरोप है कि घाट के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर गलत जानकारी और छवियां साझा की गईं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका उत्पन्न हुई.
Hindustan Times के अनुसार, पुलिस ने इन मामलों में संबंधित सोशल मीडिया हैंडल्स और उन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन्होंने फर्जी छवियों को साझा या रीपोस्ट किया. पुलिस के अनुसार, इन पोस्ट्स का उद्देश्य न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना था, बल्कि समाज में सरकार विरोधी मानसिकता भी पैदा करना था.
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं की छवियों का उपयोग कर लोगों को गुमराह किया और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया. पुलिस ने बताया कि इन पोस्ट्स के कारण सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रिया और आक्रोश देखने को मिला.
The Hindu ने बताया, शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचित किया कि उनकी कंपनी 15 नवंबर 2025 से घाट के सौंदर्यीकरण और अंतिम संस्कार संबंधी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य कर रही है. शिकायत के अनुसार, 16 जनवरी की रात एक सोशल मीडिया यूजर ने फर्जी और भ्रामक छवियां साझा कीं, जिससे समाज में तनाव बढ़ा.
Deccan Herald ने एक लेख में कहा, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में न केवल मूल पोस्ट करने वालों, बल्कि रीपोस्ट और टिप्पणी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के दौरान स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने मूर्तियों के नुकसान और विरासत के संरक्षण को लेकर चिंता जताई. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई मंदिर या मूर्ति जानबूझकर नहीं तोड़ी गई, और सभी कलाकृतियों को संरक्षित कर निर्माण कार्य के बाद पुनः स्थापित किया जाएगा.
इस रिपोर्ट में जिक्र है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर झूठ फैलाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य बिना किसी धार्मिक या सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाए किया जा रहा है.
“कांग्रेस और उसके सहयोगी झूठा प्रचार कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं. काशी में अभूतपूर्व विकास हो रहा है, और सच्चाई सबके सामने है.”
इस समाचार रिपोर्ट ने कहा, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पुनर्विकास के नाम पर काशी की विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने दोहराया कि सभी मूर्तियों और कलाकृतियों को संरक्षित किया जाएगा और कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.