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हरिद्वार: हर की पौड़ी पर कई जगह लगे गैर हिंदुओं की रोक वाले पोस्टर, बढ़ा विवाद

नगर निगम के टाउन कमिश्नर के मुताबिक प्रशासन को इस मामले की जानकारी है, लेकिन अभी कोई सरकारी निर्देश जारी नहीं हुआ.

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<div class="paragraphs"><p>हरिद्वार में लगे पोस्टर</p></div>
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हरिद्वार में लगे पोस्टर

(फोटो- X)

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हरिद्वार के प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट पर 17 जनवरी 2026 को गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले बोर्ड लगाए गए. यह कदम गंगा सभा द्वारा उठाया गया, जो घाट का प्रबंधन करती है. इस निर्णय के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी बहस छिड़ गई. राज्य सरकार ने मामले पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है, जबकि विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया है.

The Indian Express के अनुसार, गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि 1916 के ब्रिटिश कालीन समझौते और पंडित मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन में बने नियमों के तहत गैर-हिंदुओं के प्रवेश और निवास पर पहले से ही रोक थी. उन्होंने मांग की कि यह प्रतिबंध हरिद्वार के सभी घाटों पर लागू किया जाए.

Scroll की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा सभा ने शुक्रवार को घाट पर बोर्ड लगाकर आगंतुकों को इस प्रतिबंध की जानकारी दी. नगर निगम के टाउन कमिश्नर नंदन कुमार ने बताया कि प्रशासन को इस मामले की जानकारी है, लेकिन अभी तक कोई सरकारी निर्देश जारी नहीं हुआ है. राज्य सरकार के निर्देश मिलने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए सरकार सभी पक्षों से बातचीत कर रही है. उन्होंने कहा, "हम गंगा सभा, धार्मिक संगठनों और संतों से लगातार संवाद कर रहे हैं और सभी मौजूदा कानूनों की समीक्षा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा."

इस रिपोर्ट में जिक्र है, गंगा सभा के अध्यक्ष ने कहा, "हमने पहले भी मांग की थी कि हर की पौड़ी ही नहीं, बल्कि हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगे ताकि इस प्राचीन हिंदू तीर्थ स्थल की पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व बना रहे." उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम पहले से ही स्व-स्थापित है और सभी को धार्मिक परंपराओं का पालन करना चाहिए.

इस लेख में उल्लेख है, हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें दो युवक अरबी पोशाक में हर की पौड़ी पर घूमते दिखे. स्थानीय पुजारियों ने उन्हें टोका, जिसके बाद युवकों ने अपना पहनावा बदल लिया. दोनों की पहचान यूट्यूब चैनल चलाने वाले नवीन कुमार और प्रिंस के रूप में हुई, जिन पर पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई.

“हम सभी पक्षकारों से संवाद कर रहे हैं और हरिद्वार व अन्य तीर्थ स्थलों से जुड़े सभी कानूनों की समीक्षा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.” – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, विपक्षी दलों ने इस कदम को असंवैधानिक बताया है. समाजवादी पार्टी के नेता एस टी हसन ने कहा कि देश सभी के लिए है और किसी एक समुदाय के लिए नहीं. उन्होंने कहा, "यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है. संविधान के अनुसार, कोई भी भारतीय देश में कहीं भी यात्रा कर सकता है."

जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि बायलॉज का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर की पौड़ी क्षेत्र की सीमाओं को बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि नगर क्षेत्र के ज्वालापुर में बड़ी मुस्लिम आबादी है.

इस लेख में जोड़ा गया, उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि "सनातन" भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और विपक्ष की आपत्तियां तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित हैं. उन्होंने कहा कि यह नियम पहले से ही वहां स्व-स्थापित है और सभी को धार्मिक प्रमुखों और स्थानीय पुजारी समुदाय की परंपराओं का पालन करना चाहिए.

“ऐसी चर्चाओं को रोकना और प्रतिबंधित करना चाहिए. वे हमारे समाज में नफरत फैला रहे हैं.” – एस टी हसन, समाजवादी पार्टी

इस समाचार रिपोर्ट ने कहा, गंगा सभा के इस कदम के बाद हरिद्वार में सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है. कई नेताओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के मूल्यों के खिलाफ बताया है, जबकि कुछ ने परंपरा और धार्मिक भावनाओं की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है.

Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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