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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के बीच 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें भारत और जर्मनी ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इन समझौतों में रक्षा औद्योगिक सहयोग, उच्च शिक्षा, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, और वीजा-फ्री ट्रांजिट जैसी प्रमुख घोषणाएं शामिल रहीं. भारतीय यात्रियों के लिए जर्मनी के एयरपोर्ट्स पर ट्रांजिट वीजा की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा.
Hindustan Times के अनुसार, जर्मन चांसलर ने घोषणा की कि अब भारतीय यात्रियों को जर्मन एयरपोर्ट्स पर ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. यह निर्णय दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन को आसान बनाएगा और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा.
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, उच्च शिक्षा, सेमीकंडक्टर, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संवाद जैसे विषयों पर 19 समझौतों को अंतिम रूप दिया. वीजा-फ्री ट्रांजिट के साथ, भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब जर्मन एयरपोर्ट्स से होकर अन्य देशों की यात्रा के लिए अलग से ट्रांजिट वीजा नहीं लेना होगा.
हालांकि, Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा लागू होने के बाद भी, जर्मनी या शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश के लिए भारतीय यात्रियों को उपयुक्त वीजा लेना अनिवार्य रहेगा. यह सुविधा केवल ट्रांजिट यात्रियों के लिए है.
The Hindu ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा व्यापार को सरल बनाने के लिए चांसलर मर्ज़ का आभार व्यक्त किया. दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच को-प्रोडक्शन और को-डेवलपमेंट के लिए रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई, जिससे तकनीकी साझेदारी और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
इस रिपोर्ट में जिक्र है कि चांसलर मर्ज़ की यह पहली एशिया यात्रा थी, जिसमें उन्होंने अहमदाबाद के ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लिया. पीएम मोदी ने इस यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष और राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ऐतिहासिक बताया.
जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, जर्मनी और भारत ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को गहरा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई. जर्मन चांसलर ने भारत को रणनीतिक साझेदार बताया और रक्षा क्षेत्र में निर्भरता कम करने के लिए सहयोग को महत्वपूर्ण बताया.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.