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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने घोषणा की है कि वे राज्यसभा के लिए तीसरी बार नामांकन नहीं करेंगे. उनका मौजूदा छह वर्षीय कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है. यह निर्णय उन्होंने पार्टी के भीतर दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग के बाद लिया है.
The Hindu के अनुसार, मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह से अनुरोध किया था कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधि को भेजा जाए. अहिरवार ने अपने पत्र में लिखा कि इससे दलित स्वाभिमान और राजनीतिक भागीदारी को बल मिलेगा.
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा, "यह मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं." उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे तीसरी बार राज्यसभा के लिए नामांकन नहीं करेंगे.
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति समुदाय की लगभग 17% आबादी है. जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, अहिरवार ने पत्र में लिखा, "यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होगा, बल्कि दलित समुदाय के स्वाभिमान और राजनीतिक भागीदारी को भी मजबूत करेगा."
दिग्विजय सिंह 2014 से राज्यसभा सांसद हैं और 2019 व 2024 के लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. इस रिपोर्ट में जिक्र है, वे 1993 से 2003 तक लगातार दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 वर्षों तक चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी.
“यह मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं.” – दिग्विजय सिंह
2013 में सक्रिय राजनीति में लौटने के बाद दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए चुने गए. इस समाचार रिपोर्ट ने कहा, उनके इस फैसले को कांग्रेस पार्टी के भीतर सामाजिक संतुलन और दलित प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
राज्यसभा में दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग लंबे समय से उठती रही है. इस दस्तावेज़ ने खुलासा किया, दिग्विजय सिंह के इस निर्णय से पार्टी के भीतर दलित नेताओं को आगे लाने की संभावना बढ़ गई है.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.