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एक महिला के उत्पीड़न का पुराना वीडियो ऑनलाइन वायरल किया जा रहा है. इसके साथ दावा किया जा रहा है कि ये घटना केरल की है और इसकी वजह राज्य में 'हिंदुओं का अल्पसंख्यक' होना बताया जा रहा है.
हालांकि ये सच है कि घटना हुई थी, लेकिन:
वीडियो के साथ शेयर किए जा रहे दावे में लिखा है:“केरल में हो रही महिलाओं से छेड़छाड़ का वीडियो ये कोई पहला वीडियो वायरल नहीं इस प्रकार की घटना हर दिन घटित होती है इसका मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं का अल्पसंख्यक होना”
पारस गुप्ता नाम के एक शख्स के ट्वीट पर इस आर्टिकल को पब्लिश करते समय 4000 से ज्यादा रिट्वीट थे.
कई सोशल मीडिया यूजर ने फेसबुक और ट्विटर पर इस वीडियो को इसी दावे के साथ शेयर किया.
क्विंट को उसके WhatsApp टिपलाइन नंबर पर भी वीडियो और उसके साथ किए गए दावे को लेकर एक सवाल मिला था.
हमने पारस गुप्ता के ट्वीट पर जवाबों को स्कैन किया और पाया कि कई यूजर्स ने कहा था कि वीडियो में मौजूद लोग मलयालम नहीं तेलुगु बोल रहे हैं.
संबंधित कीवर्ड से सर्च करने पर हमें TV9 तेलुगु की 2017 में अपलोड किया गया एक वीडियो मिला, जिसका कैप्शन था: "लड़की से रेप की कोशिश को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया." वीडियो में लोकेशन आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में कनिगिरि बताई गई.
हमें सितंबर 2017 में पब्लिश हुआ NDTV का एक आर्टिकल भी मिला, जिसमें इस केस की जानकारी थी. आर्टिकल में बताया गया कि एक 19 साल की कॉलेज छात्रा को उसके बॉयफ्रेंड ने दबोचा और उत्पीड़न किया, जिसके बाद आरोपी और उसके दो दोस्तों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया.
तीनों आरोपियों को प्रकाशम जिले की पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
रिपोर्ट में बताया गया, "पुलिस के कहा कि लड़की और उसकी दोस्त आरोपी शख्स बी साई से मिलने एक मंदिर गई थीं. शख्स को लड़की एक साल से ज्यादा समय से जानती थी."
कनिगिरि के सर्किल इंस्पेक्टर के वेंकटेश्वरा राव ने क्विंट को वायरल वीडियो के बारे में बताया कि इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था.